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एनडब्ल्यूजीइएल चर्च का स्थापना दिवस मना

एनडब्ल्यूजीइएल चर्च के बिशप निर्दोष लकड़ा ने कहा कि नौ जून 1850 का दिन छोटानागपुर और असम के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि उस दिन आत्मा की ज्योति चमकी और जो अंधकार में थे, उन्होंने परमेश्वर को पहचाना। हमार पूर्वजों का विश्वास हमारी कलीसिया की नींव बन गयी। बिशप लकड़ा एनडब्ल्यूजीइएल चर्च के 158वें स्थापना दिवस के मौके पर संदेश दे रहे थे। इसका आयोजन सोमवार को ख्रीस्त गिरााघर में किया गया था। उन्होंने कहा कि जिस कलीसिया में सुसमाचार प्रचार का कार्य नहीं होता, उसकी लौ बुझ जाती है। इस अवसर पर डीकन सचित मिंज और प्रेमचंद बाड़ा का पुरोहिताभिषेक भी किया गया। नौ जून 1850 को हेथाकोटा के पाहन नवीन डोमन तिर्की, करांदा के घूरन उरांव और चितकुनी के केशो भगत, बंधु उरांव ने बपतिस्मा लेकर गोस्सनर कलीसिया की सदस्यता ग्रहण की थी। वे ईसाइ धर्म स्वीकार करनेवाले छोटानागपुर के पहले वयस्क व्यक्ित बने। एनडब्ल्यूजीइएलसी के झारखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, छत्तीसगढ़, ओड़िशा, दिल्ली में 720 चर्च हैं।

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