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दो टूक

नौरी मुंडू, भलेरिया बारला, सुशांति हेरां, जसमुनी तिरू, बसंती भेंगरा, राजा सुलेमान तिरू, विंसेंट कंडुलना-ये झारखंड के वो सितारे हैं, जिन्होंने हॉकी के राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में जौहर दिखाकर देश-राज्य का सिर ऊंचा किया। लेकिन आज की तारीख में झारखंडी अस्मिता के इन ‘योद्धाओं’ में से कोई चपरासी की नौकरी कर रहा है, तो किसी के पास इतने पैसे भी नहीं कि टूटी खपरैल छत की मरम्मत कर सके। राज्य में होनेवाले 34वें राष्ट्रीय खेल के नाम पर करोड़ों खर्च किये जा रहे हैं, लेकिन मुफलिसी की मार से बेजार इन ‘नायकों’ की फिक्र न तो सरकार को है, न समाज को। जरूरत इस बात की है कि समाज और सरकार की संवेदना-तंत्रिका जगे ताकि सपूतों को अपनी ही धरती पर जलालत का शिकार न होना पड़े।

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