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जेठ की तपिश में पेयजल के लिए हाहाकार

पू.च. में भूगर्भ जलस्तर से विभाग बेफिकड्र्ढr ध्रुव सिंह मोतिहारी : हिमालय की तलहटी में बसे पूर्वी चम्पारण में भूगर्भ जलस्तर के पैमाने से अनजान है लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमंडल मोतिहारी। विगत कई वर्षो से जल स्तर का वाटर टेबल क्या है, विभाग ने इसकी जांच करना मुनासिब न समझा और न इस संबंध में कभी कोई प्रयास ही करने की कार्रवाई की गई। जबकि माह में कम से कम दो बार बोरिंग कर भूगर्भ जल स्तर को पता लगाना है। अलबत्ता विभागीय अधिकारी का मानना है कि उत्तर बिहार में पानी संकट नहीं है। इसलिए भूगर्भ जलस्तर क्या है इसकी जांच की जरूरत हीं नहीं पड़ी। जबकि विभाग जलस्तर कहां से शुरू होता है इसकी जानकारी उपलब्ध कराने में ही अपने कार्यो की इतिश्री मान रहा है। कार्यपालक अभियंता के अनुसार रक्सौल के बड़े भू भाग में वाटर लेयर 150-250 फीट पर है। केसरिया मुख्यालय में भी कमोबेश यहीं स्थिति है। गंडक दियारा क्षेत्र में नदी के किनार हाइड्रोलिक ग्रेडियन के चलते पानी का जल स्तर काफी नीचे है। लेकिन भीषण गर्मी में भूगर्भ जलस्तर में होने वाले परिवर्तन से विभाग अनजान है। हालांकि सूत्रों का मानना है कि गर्मी के दिनों में भूगर्भ जलस्तर आंशिक नीचे जाने संबंधी कोई समस्या नहीं है। सीवान में पानी के लिए मचा कोहरामड्ढr मिथिलेश कुमार सिंह सीवान। जिले में भीषण गर्मी से पानी की किल्लत हो गई है। ऊपर से तपती धूप और नीचे से पानी नदारद। इससे लोगों का हलक सूख रहा है। चारों तरफ पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है। बावजूद इसके शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के प्रति पीएचईडी विभाग पूरी तरह विफल है। गांव हो या शहर, स्कूल हो या अस्पताल, रसोई हो या बाजार सभी जगह पानी की किल्लत है। हर वर्ष जसे-ौसे गर्मी बढ़ती है। वैसे-वैसे पानी की समस्या गंभीर होती जाती है। पीएचईडी विभाग ने सीवान शहर में तीन बड़े-बड़े पानी टंकी लगाये है। ताकि इन टंकियों से शहरवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध हो सके। पानी टंकी कचहरी परिसर, आनंद नगर व मजहरूल हक नगर में हैं। कचहरी परिसर स्थित पानी टंकी को छोड़ दो पानी टंकियां लोगों के लिए दिवास्वप्न बनी हुई है। शहर की 75 फीसदी आबादी को सप्लाई का पानी नहीं मिलता। जिस क्षेत्र में पानी सप्लाई है वहां की भी स्थिति लचर है। अनियमित पानी सप्लाई से लोग परशान हैं। कई स्थानों पर पाइप सड़ गयी है या फूट गयी है। इससे कभी कभी दूषित पानी भी सप्लाई होने लगता है। सप्लाई के समय अनावश्यक पानी बर्बाद भी होता है। परन्तु विभाग इस पर भी रोक नहीं लगा पाता। जिले के अधिकांश प्रखंडों में जलापूर्ति योजना के तहत पानी टंकी का निर्माण हो रहा है। परन्तु निर्माण कार्य कछुआ की गति से होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को इसका लाभ कब मिलेगा यह शायद विभाग को भी पता नहीं है। सरकारी चापाकल सभी गांवों में लगाए गए है। परन्तु ये भी बेकार साबित हो रहे हैं। कहीं कम गहरे पाइप गाड़ी गई हैं तो कहीं मामूली खराबी से बंद है। गर्मी में जलस्तर तेजी से नीचे भाग गया है।ड्ढr खिसकने लगा जलस्तरड्ढr गिरिाानंदन शर्मा समस्तीपुर । जिले में पेयजल का स्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। जेठ की तपिश आने से पहले ही जलस्तर 20 फीट से भी ज्यादा नीचे जा चुका था। 25 फीट पहुंचते ही चापाकल तथा बोरिंग पानी देना बंद कर देते हैं। जिले के कई हिस्सों, खासकर शहरी क्षेत्र में पानी की समस्या उत्पन्न होने लगी है। अधिसंख्य चापाकल पानी कम देने लगे हैं। शहर में घंटों बिजली मोटर चलाने के बाद भी ‘टैप वाटर’ के लिए लगाया गई टंकी नहीं भर पाती। बरसात के दिनों में यहां भूमिगत जल का स्तर 6-7 फीट पर रहता है। चापाकलों से कम पानी निकलने के कारण सार्वजनिक चापाकलों पर लोगों की कतार लगी रहती है। लेबल नीचे खिसकने के कारण जिले में सिंचाई भी एक समसया बन गई है । बरसात के दिनों में बाढ़ लाकर तबाही मचाने वाली बागमती और बूढ़ी गंडक का गर्भ सुख गया है । जगह जगह टीले रगिस्तान की यादें ताजा करा रहे हैं।ं

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