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परमाणु आतंक

ारूर दाल में कुछ काला है, अन्यथा परमाणु हथियारों के जेहादी संगठनों के हाथ में पड़ने की आशंका पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सार्वजनिक बयानबाजी न करते। प्रधानमंत्री से पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार एम.के. नारायणन और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊरा एजेंसी के प्रमुख भी दुनिया को इस खतर के प्रति चेता चुके हैं। उत्तर कोरिया और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से भयभीत विश्व के सामने महाविनाश का इरादा रखने वाले आतंकवादियों के मंसूबों को विफल करना एक कड़ी चुनौती है। परमाणु शस्त्रों से लैस पाकिस्तान का अस्थिर राजनैतिक माहौल तथा अफगानिस्तान में हावी होते अलकायदा के कारण भारत ऐसे आक्रमण की जद में है। हाथ-पांव फुलाने के बजाय यह समय अपने सुरक्षा तंत्र के ढीले पड़े तारों को कसने का है। आशा है विभिन्न गुप्तचर संगठनों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के काम को सरकार उच्च प्राथमिकता देगी। परमाणु हमले से निपटने की हमारी तैयारी प्रारम्भिक स्तर पर है। यदि किसी सिरफिर जेहादी संगठन के हाथ महाविनाश के हथियार लग गए तो उससे होने वाले जान-माल के नुकसान की कल्पना करना कठिन है। पाकिस्तानी वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान की ‘कृपा’ से परमाणु बम बनाने की तकनीक दुनिया के बाजार में धड़ल्ले से बिकी है। कहना कठिन है कि बम बनाने का फामरूला कुछ खतरनाक हाथों में नहीं पहुंचा है। संभावित जेहादी संगठनों की पहचान और उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए अंतरराष्ट्रीय तालमेल जरूरी है।परमाणु अप्रसार समझौते के बाद दुनिया ज्यादा असुरक्षित हो गई है। इसका कारण है गैर बराबरी का बर्ताव। परमाणु हथियारों से लैस पांच बड़े देश महाविनाश के शस्त्रों पर एकाधिकार बनाए रखना चाहते हैं, जो भारत सहित कई देशों को मंजूर नहीं है। अनेक देशों को लगता है कि अपनी सुरक्षा के लिए उनके पास परमाणु हथियार होना जरूरी है। अंतरिक्ष सुरक्षा के नाम पर हथियारों की होड़ तेज होती दिख रही है। जेहादी संगठनों पर काबू करने के साथ-साथ परमाणु हथियार समाप्त करने पर अंतरराष्ट्रीय पहल किया जाना समय की मांग है। विकासड्ढr और ऊरा के लिए परमाणु तकनीक का प्रयोग तो उचित है, किंतु दुनिया कोड्ढr बर्बाद करने के लिए बम बनाना समझ से बाहर की बात है। इसीलिए भारत चाहता है कि निरस्त्रीकरण समझौता छोटे-बड़े सभी देशों पर लागू हो।ड्ढr

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  • Web Title: परमाणु आतंक