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दाता का धन्यवाद

विनम्रता और शिष्टाचार का पाठ हम लंदन से बखूबी सीख सकते हैं। इस महानगर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां ‘थैंक-यू’ शब्द का जिस कदर इस्तेमाल होता है, उतना दुनिया में कहीं नहीं हेाता। यहां लोग बात-बात में एक दूसर का ही नहीं भगवान का भी शुक्रिया अदा करते हैं। और होना भी चाहिए। हर वस्तु के लिए इंसान को हर क्षण कृ तज्ञ रहना भी चाहिए। कुदरत की सारी चीजें, इंसान की सारी क्षमताएं दाता की देन हैं, इसलिए उसका शुक्रिया अदा करना तो हमारा र्फा ही है।ड्ढr एक महात्मा एक राजा के पास गए। राजा ने आदर-सत्कार, सारी सुख-सुविधाएं सब कुछ उनके सम्मान में पेश कर दिया। सुबह महात्मा ने देखा कि राजा प्रार्थना कर रहे हैं। वे कान लगाकर सुनने लगे। राजा कह रहा था- जो दिया उसके लिए धन्यवाद, आगे भी ऐसी ही कृपा बनाए रखना। महात्मा जाने लगे तो राजा ने भिक्षा देनी चाही। महात्मा ने कहा- तू मुझे क्या देगा। तू तो खुद ईश्वर से मांगता है। तूं कंगाल है। हमें जरूरत हुई तो उसी ईश्वर से मांग लेंगे। सचमुच इस लिहाज से तो हर इंसान कंगाल है। उसके पास अपना कमाया कुछ नहीं, सब कुछ कुदरत की ही देन है। इसलिए हमें हर हाल में धन्यवाद का भाव रखना चाहिए। खुशहाली और बदहाली हर हाल में शुक्रगुजारी का भाव आनंददायक होता है। जो शुक्रगुजार होगा वही आशावादी बनेगा। परशानियां तो हर किसी की जिंदगी में हैं। बावजूद इसके जिंदगी बेहद खुशनुमा है। अब यह आपको तय करना है कि आप इसे कुढ़ते-भुनभुनाते हुए जीना चाहते हैं या पूर उत्साह और आनंद के साथ। मन खुश तो सब कुछ चंगा। इससे तनाव भी घटता है और सेहत भी बनती है। जरूरत बस जिंदगी का नजरिया बदलने की है। जो मिल गया, उसी को मुकद्दर मान लें। जो नहीं मिला उसके लिए प्रयास कर सकते हैं, वरना जो नहीं मिला, उसी के लिए कुढ़ते रहेंगे। बस एक पल ठहरिये और सृष्टि के रचनाकार का शुक्रिया अदा करने का नियम बनाइये।ड्ढr

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