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ब्लॉग वार्ता : सत्ता के शिखर से दोतरफा संवाद

गया जमाना जब बंदूक के जवाब में अखबार निकालने की बात होती थी। अब ब्लॉग निकालने का दौर आ रहा है। ईरान के राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद पिछले दो साल से ब्लॉगिंग कर रहे हैं। पता है ँ३३स्र्:६६६.ंँं्िर्नी्नं.्रि। अहमदीनेजाद कहते हैं कि लोगों से सीधा और दोतरफा संवाद कायम करने के लिए ब्लॉग बनाया है। वे हफ्ते में पंद्रह मिनट ब्लॉग के लिए देने का वादा करते हैं। अमेरिका परमाणु कार्यक्रम के बहाने ईरान निशाना बनाने के लिए अहमदीनेजाद की छवि एक कठमुल्ला नेता और तानाशाह की बनाने की कोशिश कर रहा है। ब्लॉग के जरिए अहमदीनेजाद इस अभियान का जवाब देते हैं। ब्लॉग उन्हें ताकत दे रहा है, जो उन्हें प्रेस कांफ्रेंस के बाद अखबारों में छपे उनके बयान से नहीं मिलती होगी। यहां अहमदीनेजाद ईरान के इस्लामी मुल्क होने से जुड़े पूर्वाग्रहों से लड़ते हैं। कहते हैं इस्लामी मुल्क का इतना ही मतलब है कि जनता की खिदमत की जाए। इस ब्लॉग पर एक अमेरिकी मां लिखती है कि वे बुश के खिलाफ हैं। उसके बेटे को जबरन युद्ध में ोजा गया। उसकी जसी तमाम माताएं बुश का विरोध करती हैं। इस टिप्पणी के जवाब के बहाने ईरान के राष्ट्रपति को अमेरिकियों से सीधे संवाद करने का मौका मिल जाता है। वे लिखते हैं कि इस्लाम शांति के खिलाफ नहीं है। एक मिसाल देते हुए अपनी बात बढ़ाते हैं कि जब खाड़ी में ईरान के यात्री विमान को अमेरिका ने उतरने दिया तब भी ईरान की जनता ने यह नहीं कहा कि अमेरिका पर हमला करना चाहिए। ईरान के खिलाफ सद्दाम को मदद करने वाला अमेरिका ही था। आज दोनों का मकसद पूरा नहीं हो सका। ईरान की एक इंच जमीन किसी के हाथ नहीं लग सकी है। यह लिखते हुए अहमदीनेजाद का एक किस्म का आत्मविश्वास भी झलकता है। ब्लॉग उनके लिए बम से ज्यादा ताकतवर है।ड्ढr अहमदीनेजाद की तमाम बातों को ब्लॉग पर आने वाला पाठक संदेह और अचरा से पढ़ता है। एक टिप्पणीकार कहता है कि ईरान के बार में जानने का मौका इस ब्लॉग में मिलता है। जो टिप्पणी आती है उसके जरिए वे लोगों का मन पढ़ सकते हैं। अखबार और टीवी से शायद सब कुछ कम मिलता हो। हिन्दुस्तान में नेता ब्लॉग से दूर हैं। नेशनल कांफ्रेंस के नेता ओमर अब्दुल्ला ने हाल ही में अपना ब्लॉग बनाया है। ँ३३स्र्:्न‘ू.१ु’ वे संसद के सेंट्रल हॉल से ब्लॉगिंग करते हुए लिखते हैं कि इस जगह पर मिलने वाली सस्ती कॉफी और टोस्ट के बाद भी लोग यहां इसलिए आते हैं, ताकि नेताओं से पहचान बढ़ा सकें, राज्यपाल पद के लिए लॉबी कर सकें। संसद के भीतर बैठे इस युवा नेता के ब्लॉग से कश्मीर पर उनके विचार खूब मिलते हैं।ड्ढr ओमर कहते हैं कि चुप रहने से अच्छा है दोहरपन की जिंदगी। संसद से वेतन लें और कश्मीर में केन्द्र सरकार की करतूतों के खिलाफ आवाज उठायें। हाल ही में 25 मई को जब उन्होंने कश्मीर दौरे पर गईं राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की एकके-47 उठाये तस्वीर के बार में लिखा तो पूर देश के अखबारों ने प्रमुखता से छापा। यह आने वाले दिनों में ब्लॉग की ताकत की झांकी है।ड्ढr हाल ही में रलमंत्री लालू प्रसाद के ६६६.८स्र्स्र्‘१.ू पर ब्लॉगिंग करने की खबर सुर्खियों में छा गई। जबकि ब्लॉग के नाम पर लालू का गुर्जर आंदोलन पर एक बयान छपा था। लालू ने कहा था कि सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना गलत है। जवाब में एक टिप्पणीकार ने पूछ लिया है कि आपकी पार्टी आरोडी बिहार में क्यों धरना-प्रदर्शन के नाम पर तोड़-फोड़ करती है, तब याद नहीं आता। यह अभी साफ नहीं कि लालू प्रसाद इस ब्लॉग पर खुद लिखेंगे या उनके बयान प्रेस रीलिज की तरह छापे जाएंगे।ड्ढr उधर फेसबुक भी नेताओं का पसंदीदा अड्डा बन रहा है। चीन के प्रधानमंत्री वे जिया-बाओ भी फेसबुक पर आ गए हैं। अमेरिकी खेल बेसबॉल को पंसद करने वाले वेन जिया-बाओ की फेसबुक दुनियाभर में चर्चा का विषय है। फेसबुक समर्थक बनाने का भी अड्डा है। वेन जिया-बाओ के फेसबुक पर अड़तालीस हाार पांच सौ समर्थकों के नाम और उनकी तस्वीरं दर्ज हैं। अमेरिका में बराक ओबामा और हिलेरी क्िलंटन के फेसबुक में लाख से भी ज्यादा समर्थक हैं। लेकिन जार्ज बुश के फेसबुक पर सिर्फ बारह हाार। ये संकेत हैं आने वाले समय में इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले मतदाताओं को जोड़ कर खेल करने का। फेसबुक और ब्लॉग के जरिये नेता अपनी लोकप्रियता का दावा कर सकते हैं। जाहिर है कि हमार ये नेता इससे दूर क्यों रहें?ड्ढr

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