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ऊचरा नहीं, बम की राजनीति

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि दुनिया के सार देश परमाणु हथियारों को त्याग दें। सही बात है, परमाणु का इस्तेमाल लोगों को मारने के लिए नहीं, ऊरा देने जसे महत्वपूर्ण काम के लिए होना चाहिए। हालांकि प्रधानमंत्री भी जानते हैं कि यह सब इतना आसान नहीं है। वे खुद काफी समय से परमाणु ऊरा हासिल करने के लिए सर पटक रहे हैं, लेकिन काम नहीं बन रहा। उसकी एक जटिल प्रक्रिया है, जो कभी घरलू राजनीति में फंस जाती है तो कभी अंतरराष्ट्रीय दबावों में। दूसरी तरफ पूरी दुनिया को परमाणु बम बनाने की तकनीक बेचने वाला वैज्ञानिक अब्दुल कादिर अब फिर खुला घूम रहा है। परमाणु ऊरा की तकनीक बहुत कम देशों के पास है, लेकिन परमाणु बम बहुत से देशों ने बना लिए हैं।ड्ढr सिकंदर उस्मान, निजामुद्दीन, दिल्लीड्ढr पास के स्कूल में पढ़ें बच्चेड्ढr दिल्ली में सरकार ने नियम बनाया था कि बच्चे अपने घर के पास के स्कूल में ही पढ़ेंगे। लेकिन इसे लागू नहीं किया गया और बच्चे आज भी बहुत दूर पढ़ने के लिए जाते हैं। अभी छुट्टियां हैं, लेकिन जुलाई में जब स्कूल खुलें तो इसे सख्ती से लागू किया जाना चाहिए। इसका अच्छा तरीका है कि सुबह बच्चों को स्कूल ले जाने वाली बस, वैन और सूमो वगैरह पर पाबंदी लगा दी जाए। अगर हमें वास्तव में पेट्रोल बचाना है, तो ऐसी कई चीजों को सख्ती से लागूु करना होगा। शुरुआत स्कूलों से की जानी चाहिए।ड्ढr रोशन लाल गर्ग, सब्जी मंडी, दिल्लीड्ढr दिखावे की कम खर्चीड्ढr पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम बढ़ाने के बाद प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने मंत्रियों को सलाह दी कि वे अपने विदेश दौर रद्द कर दें। त्वरित एक्शन दिखाते हुए तीन-चार मंत्रियोंे ने अपने दौर रद्द करने की घोषणा भी कर दी। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या ये दौर महत्वपूर्ण नहीं थे?ड्ढr अगर महत्वपूर्ण थे तो इन्हें रद्द करने से हुई बचत की बजाय नुकसान ज्यादा होगा। मंत्रियों के रवैये से लगता है कि दौर समर हॉलिडे थे, जिन्हें कैंसिल कर वे देश पर एहसान कर रहे हैं।ड्ढr विश्वास कुमार, सेक्टर-40, चंडीगढड़्ढr पतन की राजनीतिड्ढr जब योग्यता की जगह किसी देश में व्यक्ित की जाति महत्वपूर्ण हो जाये तो उसका पतन निश्चित है। भारत लंबे समय से जातिवाद के दंश से पीड़ित है। सार्वजनिक और निजी जीवन में मूल्यों में आई गिरावट इसकी ही देन है। यों तो जातिवाद के जहर को खत्म करने के प्रयास लंबे समय से होते रहे हैं, पर नतीजा कुल मिलाकर शून्य ही रहा। जातिवाद की राजनीति में जुटी पार्टियों को वोट बैंक की राजनीति ने अंधा बना दिया है। ऐसे में समाज हित में वे दूर दृष्टि से काम लेंगे इसकी उम्मीद भी कोई कर तो कैसे।ड्ढr मेजर, फेा 2 मोहालीड्ढr कम खर्च से होगा मूल्य नियंत्रणड्ढr पेट्रो पदार्थो के मूल्यों में हुई बेतहाशा वृद्धि इस बात का संकेत है कि अनियंत्रित मांग बनी रही तो मूल्यवृद्धि आगे भी जारी रहेगी। इसे रोकने का सबसे आसान उपाय पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम मजबूत और आरामदायक बनाना है। जसे दिल्ली में मेट्रो ने कई रास्तों पर लोगों की कार की आदत छुड़वा दी। ऐसे प्रयोग दूसर शहरों में भी किए जा सकते हैं।ड्ढr हरप्रीत बावेजा, सेक्टर 70, मोहालीड्ढr ं

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