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सामान खरीदते हुए एक्सपायरी डेट देखना न भूलें

आप बाजार में जब भी खाने-पीने का सामान खरीदने जाते हैं तो क्या उसकी एक्सपायरी डेट चेक करते हैं। आमतौर पर लोग प्रोडक्ट का दाम तो देखते हैं लेकिन उसकी एक्सपायरी डेट देखने की जहमत नहीं उठाते। अब जब कीमतों में आग लगी हो और मौसम भी इतना नमी भरा हो तो ऐसे में एक्सपायरी डेट की जांच करना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। मामला सीधा है, खाने-पीने का सामान खरीदने समय बेस्ट बिफोर की डेट से पहले मैन्यूफैक्चरिंग डेट देखनी चाहिए। ऐसा सामान ज्यादा समय के लिए स्टोर किया जा सकता है। लेकिन निर्माता का खेल काफी पेच भरा होता है। वह पैकेट पर ऐसी जानकारी घुमा-फिरा कर देता है। खाद्य मिलावट रोकथाम अधिनियम के मुताबिक कस्टमर इसे आसानी से पढ़ सके इसके लिए मैन्यूफैक्चरिंग डेट और बेस्ट बिफोर डेट शब्द बड़े छपे होने चाहिए लेकिन दुर्भाग्य है कि ज्यादातर निर्माता इसका पालन नहीं कर रहे। कहीं फोंट छोटा कर दिया जाता है तो कहीं उसे देख कर साफ पता चल जाता है कि उसे छुपाने की दृष्टि से यहां वहां छाप दिया गया है। यहां पर यह सवाल उठता है कि ये दोनों महत्वपूर्ण तिथियां एक साथ एक ही जगह पर क्यों प्रिंट नहीं की जातीं और न ही उन्हें पैकेट पर प्रमुखता से छापा जाता है। इसके चलते कस्टमर को इन तिथियों की जांच के लिए पैकेट को पूरा खंगालना पड़ता है। निर्माता क्यों ये दो लाईन लिखकर कस्टमर की परीक्षा लेता है जबकि वह दो तिथियों को छाप कर काम हल्का कर सकता है।ड्ढr निर्माता क्यों कस्टमर को उलझाने का प्रयास करता है। यही नहीं देखा जाए तो हर निर्माता कस्टमर को ऐसी प्रतियोगिता में उलझाने के फेर में है जिसमें कोई इनाम नहीं मिलता यानी बूझो तो जानो कि ये दोनों डेट पैकेट पर कहां छपी हैं। एक पर डेट छपी है तो दूसर पर एम्बोस की गई है। कोई एक डेट साफ छापता है तो कोई सिर्फ महीना और वर्ष छापता है। कहीं तो इन दोनों तिथियों की दूरी ही काफी ज्यादा होती है। क्यों नहीं दवाओं की तरह इन्हें एकसाथ छापा जाता। क्या हम केंद्रीय खाद्य मंत्रालय से उम्मीद कर सकते हैं कि वह इसके लिए कोई निधार्रित प्रारूपड्ढr तैयार करेगा।ड्ढr

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