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पर मुख्तार के खिलाफ पैरवी क्यों ठंडी है?

मई में यूपी पुलिस ने करीब 18 हाार माफिया, पेशेवर और इनामी अपराधियों के खिल्ऽव ़ॅìऽव ं ड्डॅ। ऽवक्ष्ड्ढ इत्त्द्यप् ुक्वूवड्ढ व?ााफ कार्रवाई की पर इनमें माफिया मुख्तार अंसारी का नाम शामिल नहीं है। प्रमुख सचिव गृह ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कानून व्यवस्था की पिछली समीक्षा बैठक के बाद ऐलान किया था कि मुख्तार सरीखे माफिया के खिलाफ चल रहे पुराने मामलों में विशेष अधिवक्ता नियुक्त कर पैरवी कीोाएगी पर ऐसा नहीं हुआ। मऊ दंगे के मामले में आामगढ़ केोिस वकील को नियुक्त कियाोाना है, गृह विभाग व प्रशासन उसकी फीस ही तय नहीं कर पाया है।ड्ढr यह मामला 14 अक्टूबर 2005 को मऊ में भरत-मिलाप के दौरान हुए दंगों का है। कमाोर अभियोन के कारण सितम्बर 2006 में मुख्तार व 32 अन्य आरोपियों को दोषमुक्त करार दे दिया गया। दोबारा अपील करने व नए सिर से साक्ष्यों को रखने मामला तब से अटका हुआ है। अब मुख्तार अंसारी के मामले में नए सिरे से पैरवी कीोानी है। अदालत के सामने उन साक्ष्यों को रखाोाना हैोो पिछली सरकार के शासन में नहीं रखेोा सके। इस वास्ते विशेष अधिवक्ता के तौर पर एक वरिष्ठ वकील का नाम प्रस्तावित है पर न तो मऊ प्रशासन उनकी फीस ही तय नहीं कर पा रहा है और न ही गृह विभाग। इस बार में मुख्यमंत्री मायावती को भी पत्र ोकर पूर मामले से अवगत कराया गया है।

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