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मंत्रियों-विधायकों की चुप्पी पर उठाये सवाल

सामाजिक कार्यकर्ता शैलेंद्र जी ने कहा कि राज्य सरकार को छोड़ कर सभी जानते हैं कि ललित मेहता की हत्या किसने की। आखिर राज्य सरकार सच्चाई से मुंह क्यों मोड़ना चाहती है। सरकार के हाथ किसने बांध रख हैं। इसका खुलासा मुख्यमंत्री को करना चाहिए।ड्ढr अब यह लड़ाई मंजिल तक पहुंचे बिना रुकने वाली नहीं है। उन्होंने मंत्री कमलेश सिंह, विधायक इंदर सिंह नामधारी और विदेश सिंह की चुप्पी पर सवाल खड़ा किया। शैलेंद्र ने निष्पक्ष जांच के लिए पलामू के डीसी और एसपी को तत्काल बदलने की मांग की। कहा यह जरूरी है।ड्ढr माफिया तत्व हावीड्ढr मुन्नी हांसदा ने कहा कि राजसत्ता, बिचौलिये और माफिया तत्व गांव में हावी हैं। इन्हें भगाने के लिए जनशक्ित को मजबूत करना होगा। उन्होंने कहा कि संतालपरगना में भी नरगा में व्यापक लूट हो रही है।ड्ढr विनय ओहदार ने कहा कि झारखंड में लुटेर और भ्रष्टाचारियों का राज है। खगेंद्र ठाकुर ने कहा कि हत्या के कारण ईमानदारी की आवाज दबने वाली नहीं है। पंचायत चुनाव नहीं होने से राज्य को 12 हाार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हो चुका है। केएन त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने 18 जिलों के 115 ब्लॉक में जांच की। गड़बड़ी की रिपोर्ट भी सौंपी गयी, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पता चलत, तो छोड़ब न ओकरा..बस ललित का फोटो देख लपक पड़ी मीना देवीड्ढr हिन्दुस्तान ब्यूरो रांची मीना देवी पढ़ नहीं सकती, पर फोटो देखकर पत्रिका लपक ली। अंचरा के कोर में बंधे पांच का नोट झटके में निकाल दिया।ड्ढr चना- चबेना के लिए यह पैसे रखे थे। घर जाकर बुतरू से इस पत्रिका को पढ़वायेगी। इसमें ललित मेहता की कहानी है। राजधानी में दमन विरोधी भ्रष्टाचार संघर्ष समिति की रैली में भाग लेने को छतरपुर (पलामू) से आयी मीना देवी अकेली नहीं जो ललित की हत्या से आहत है। महिलाओं का जत्था आया था। नंगे पांव, हाथ में थैली, सत्तू की पोटली और और चेहर पर आक्रोश की झलक।ड्ढr पत्रिका के मुख्य पृष्ठ पर ललित का फोटो है। गांव- गिराव की महिलाएं एकटक निहार रही थीं। पूछने पर दो टूक जवाब: इनकर चलते (ललित) तो यहां आइल ही। पांच गो रुपया निकाले के फिकर नइखे..।ड्ढr किसने मारा है ललित को? इस सवाल पर मीना देवी हत्थे से उखड़ जाती हैं: पता चलत, तो छोड़ब न ओकरा..।ड्ढr खाना खिलौंले रहीं बाबू के। गरीब के लड़ाई में शामिल रहें बेचारा। यही लड़ाई के आगे बढ़ावे तो रांची आये हैं। परिवर्तन के लिए चाहिए नयी पार्टी : अग्निवेशड्ढr बंधुआ मुक्ति आंदोलन के प्रणेता स्वामी अग्निवेश ने कहा कि अब तनिक भी देर किये बिना गरीबों और कमजोर वर्ग को अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनानी चाहिए। पच्चीस-तीस वर्षो तक हम देख चुके। हिंसा के रास्ते और चुनाव बहिष्कार से हमें कोई लाभ नहीं मिलने वाला।ड्ढr जब तक हम राजनीतिक शक्ति के साथ अपनी उपस्थिति नहीं दिखायेंगे, ऐसे ही ललितों को मरवाया जाता रहेगा। छतरपुर के ललित मेहता हत्याकांड के खिलाफ 10 जून को आयोजित रैली में भाग लेने रांची पहुंचे अग्निवेश हिन्दुस्तान से बातचीत कर रहे थे।ड्ढr अग्निवेश ने कहा कि गरीबों को नरगा जसा छोटा हक भी इसलिए मयस्सर नहीं कि हम संगठित नहीं हैं। राजस्थान में अरुणा राय के संगठन ने काम किया तो वहां नरगा ठीक चल रहा है। लेकिन, जहां सरकारी तंत्र के भरोसे है वहां भ्रष्टाचार जारी है। झारखंड में भी मजबूत संगठन की जरूरत है। राजनीतिक दलों पर भरोसा उठ चुका है। कोई छोटा चोर है तो कोई बड़ा। इसलिए, जरूरत है एक नयी पार्टी की। किसी अन्य पार्टी को समर्थन देने के सवाल पर अग्निवेश क्षुब्ध भाव से कहते हैं : जेपी के कहने पर हमने अपनी पार्टी वैदिक समाजवाद का जनता पार्टी में विलय किया था।ड्ढr तीन महीने में ही मोह भंग हो गया। पिछले दिनों नंदीग्राम में वामपंथियों की भूमिका भी निराशाजनक रही। पूंजीवाद के खिलाफ लड़ाई में भी वह पिछड़ चुके हैं। भाजपा पर सांप्रदायिकता का लेबेल है। इसलिए मैं राजनीतिक दलों के सोशल ऐक्िटविस्टों को नयी पार्टी बनाकर व्यवस्थामूलक परिवर्तन के लिए आमंत्रित करता हूं।ड्ढr पलामू में गरीबी और पसरते उग्रवाद पर अग्निवेश कहते हैं कि हथियार उठाने की जरूरत नहीं, बैलेट के जरिए सरकारं बदली जा सकती हैं।. . ताकि फिर एसा न होसंवाददाता गढ़वा सामाजिक कार्यकर्ता ललित मेहता की पत्नी आश्रिता ने अपने पति की हत्या की सीबीआई से जांच कराने की मांग की है। उसने कहा कि अब किसी और सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या न हो। यदि ऐसा हुआ तो सामाजिक कार्य का प्रवाह रुक जायेगा। वह कहती है उन्होंने (ललित ने) बताया था कि दिल्ली से ज्यां द्रेज की टीम आ रही है। नरगा योजना की जांच होनी है। जांच टीम में वह भी शामिल हैं। हत्यारों को यह पता था कि ललित 15 मई को सात बजे सुबह मेदिनीनगर से छतरपुर के लिए निकलने वाले हैं। उनकी किसी से दुश्मनी नहीं थी। सीबीआइ ही इस कांड की परत खोल सकती है। वह जानना चाहती है कि इतने अच्छे इंसान के खून के प्यासे आखिर कौन हैं और वे क्या चाहते थे? हत्यारों को शासन का वरदहस्तड्ढr नरगा और आरटीआइ जसे अवसर को आम लोग भले ही कम आंकें, भ्रष्टाचार में लिप्त नौकरशाही, राजनेताओं और ठेकेदारों की तिकड़ी इसे बड़ी चुनौती मान रही है। वह जानती है कि मुद्दा चाहे छोटे से प्रखंड छतरपुर का हो, शुरुआत होते ही नहीं दबाया गया तो उन सबकी पोल खुलने लगेगी।ड्ढr ललित मेहता की वीभत्स हत्या उसी की बानगी है। लेकिन, हम छोड़ेंगे नहीं। इसे लॉजिकल एंड (तार्किक परिणति) तक ले जायेंगे। राष्ट्रीय जनांदोलन ही नहीं, राजनीतिक मोर्चा भी खोलेंगे। चर्चित सोशल ऐक्िटविस्ट अरुणा राय हिन्दुस्तान से विशेष भेंट में बोल रही थीं।ड्ढr राय मानती हैं कि रोगार गारंटी का अधिकार नरगा और सूचना के अधिकार आरटीआइ जसे कानूनों ने लोकतांत्रिक शक्ति का विकेंद्रीकरण किया है। ये कानून संविधान के तहत मिले हमार अधिकारों को प्रयोग में लाने का जरिया हैं। आम जनता के हाथ में यह हथियार आ जाने से भ्रष्ट और स्वार्थी तत्व बहुत परशान हैं। राय के अनुसार झारखंड में भ्रष्टाचार अधिक है। सरकार इसे रोकने में विफल दिख रही है। ललित हत्याकांड से आहत राय ने पुलिस की निष्क्रियता को कोसा और सत्तारूढ़ पक्ष की मंशा पर संदेह जताते हुए कहा- ललित के शव को पहचाने बिना दफना दिया जाना और महीना बीतने के बाद भी हत्यारों का सुराग जुटाने की बजाय पुलिस की खामोशी बता रही है कि इसके पीछे शासन के लोगों का वरदहस्त है।ड्ढr नरगा काउंसिल की सदस्य अरुणा राय बताती हैं कि काउंसिल ने केंद्र में मंत्री से बात की है। सीबीआइ जांच पर सहमति भी है। लेकिन, हम चाहते हैं कि राज्य सरकार और प्रशासन नरगा में काम करनेवाले तमाम लोगों की सुरक्षा की गारंटी दे। जसा की आंध्रप्रदेश में है। अरुणा राय ललित हत्याकांड के खिलाफ आयोजित एक रैली में हिस्सा लेने रांची आयी थीं। नरेगा में कोताही बर्दाश्त नहीं : राजासंवाददाता रांची भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने कहा है कि ललित हत्याकांड की सीबीआइ जांच होनी ही चाहिए। भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए यूपीए को समर्थन देना वाम दलों की जरूरत है, लेकिन ऐसी घटनाएं उनकी पार्टी को कतई बर्दाश्त नहीं। ललित हत्याकांड के विरोध में आयोजित रैली को संबोधित करने रांची पहुंचे राजा ने हिन्दुस्तान से विशेष बातचीत में यह कहा।ड्ढr डी राजा ने कहा कि नरगा एक्ट को राज्यों के ग्रामीण जिलों में चलाया जाना अच्छी पहल है। हम तो उसे पूर देश में लागू करने की मांग कर रहे थे। लेकिन, इस बीच ललित हत्याकांड जसी घटनाएं सफलता की दिशा में चिंता पैदा करती हैं। ऐसा लग रहा है कि शासन में व्याप्त भ्रष्टाचार और कुप्रशासन इस योजना पर हावी होने की कोशिश कर रहा है। राज्य और प्रशासन की जिम्मेवारी बनती है कि इसे गंभीरता से ले। नरगा के सफल क्रियान्वयन के लिए सोशल ऑडिट अनिवार्य है। इसमें शासन को सहयोग देना ही होगा।ड्ढr ललित हत्याकांड पर चिंता व्यक्त करते हुए राजा ने कहा कि संसद में इस पर बहस हुई है। संसद के बाहर भी नरगा की सफलता के लिए बहस जारी है। नरगा एक्ट को लागू कराना अब सरकारों का संवैधानिक दायित्व है। सीपीआइ इसमें कोई कोताही बर्दाश्त नहीं करगी। दिल दहलानेवाली घटना: जुरीड्ढr रांची। रैली में हिस्सा लेने असम से रांची पहुंची युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव जुरी एस बोर्दोलोई ने कहा कि ललित हत्याकांड दिल दहलानेवाली घटना है। साथ ही यह इंगित करती है कि राज्य में शासन कितना ढीला-ढाला चल रहा है। हिन्दुस्तान से बातचीत के दौरान जुरी ने आगे कहा कि नरेगा के गठन के वक्त युवा कांग्रेस ने काफी जोर-शोर से हिस्सा लिया था, परंतु क्रियान्वयन में कहीं कमजोरी जरूर है। इसके लिए जनता को भी जागरूक होना होगा। हमें इस बात का दुख है कि झारखंड में युवा कांग्रेस इसके खिलाफ अब तक आगे नहीं आयी है। सामाजिक कार्यकर्ताओं को सुरक्षा की गारंटी मिलेमुख्यमंत्री को चार सूत्री ज्ञापन सौंपा गयाड्ढr हिन्दुस्तान ब्यूरो रांची दमन भ्रष्टाचार विरोधी संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री को चार सूत्री ज्ञापन सौंपा है। इसमें कहा गया है कि ललित मेहता हत्याकांड की सीबीआइ से जांच करायी जाये। सोशन ऑडिट के माध्यम से नरगा के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार के जितने मामले सामने आये हैं, उनकी जांच कराकर दोषी लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाये।ड्ढr राज्य सरकार नरगा के तहत हरक परिवार को साल में पूर 100 दिन रोगार और पूरी मजदूरी दिलाने की गारंटी दे। सरकार स्वार्थी तत्वों पर अंकुश लगाये और सामाजिक कार्यकर्ताओं को सुरक्षा की गारंटी दे। ज्ञापन में कहा गया है कि राज्य गठन के आठ साल के बाद भी गरीबी की साया नजर आती है। योजनाएं समय पर पूरी नहीं होती। अपराध का ग्राफ आसमान छू रहा है। नेता सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने में लगे हैं। सरकार का शायद ही कोई महकमा हो, जहां भ्रष्टाचार का बोलबाला नहीं हो। नरगा कानून भी भ्रष्टाचार के दलदल में फंस गया है। अधिकारियों की लंबी फौा और सरकारी तंत्र ठेकेदारों के साथ सांठगांठ कर गरीबों के हक की रोटी छीन रहा है। सोशल ऑडिट की रिपोर्ट इसका खुलासा करती है। इसी क्रम में ललित मेहता की हत्या कर दी गयी।ं

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