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गर्मी की छुट्टियां पूरे साल के काम पर भारी

इस बार की गर्मी माट साबों के लिए पसीना छुड़ा रही है। बेचार सर, सुबह सबेरे उठकर झोला लटकाए स्कूल की राह पकड़ने के लिए मजबूर हो गए हैं। सरकार ने इस बार काम का बोझ जो बढ़ा दी है। बंदा एक काम अनेक, वाली कहावत इन पर चरीत्रार्थ हो रही है। गर्मी की छुट्टी में सर्द फुहारों को लेने का मजा तो उनके मन में ही दबकर रह गया है। घरवालों ने भी सर की इस वेबफाई पर उनसे किनारा कर लिया पर क्या करं काम तो काम है।ड्ढr ड्ढr बच्चों को पढ़ाने व स्कूल का हिसाब-किताब रखने से लेकर अन्य काम माट साब को ही करना पड़ रहा है। पढ़ाई में कमजोर बच्चों को खोजने की जिम्मेदारी भी उन्हीं पर अलग से है। शिक्षा विभाग की कृपा से घरवाली की डांट खानी पड़ रही सो अलग। गर्मी की छुट्टी में परिवार के साथ घूमने के लिए बनी योजना पर जो पानी फिर गया है। वहीं बच्चों का सर्वागीण विकास करने के लिए शिक्षकों को पढ़ाई भी करनी पड़ी है। पटना सदर प्रखंड 250 शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने से पहले दो दिनों का प्रशिक्षण दिया गया है। इसमें शामिल होकर उन्होंने शिक्षण के जो प्रशिक्षण हासिल किए हैं उसका कितना लाभ छात्रों को मिलेगा यह तो भविष्य के गर्त में है।ड्ढr ड्ढr अभी बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के निर्देश पर जिले के सभी प्राथमिक व मध्य विद्यालयों में समर कैंप लगाये गये हैं। एक से 30 जून तक चलने वाले इस कैंप में कक्षा तीन, चार व पांच के वैसे बच्चों का सर्वागीण विकास किया जा रहा है। वैसे छात्र जो धाराप्रवाह कहानी नहीं पढ़ते हैं और न ही दो अंकों का जोड़-घटाव कर पाते हैं उनको विशेष रूप से शिक्षित किया जा रहा है। इस कार्य में लगभग सभी शिक्षकों को लगा दिया गया है। इसके अलावा फोटो पहचान पत्र का सत्यापन कार्य उन्हें अलग से कराना पड़ रहा है। इसके अलावा स्वास्थ्य व शिक्षा विभाग के अन्य कार्यक्रमों में उन्हें विशेष रूप से भाग लेना पड़ता है। अब एक शिक्षक कितना काम करगा। एक शिक्षक कहते हैं सरकार इतनी अमानवीय कैसे हो सकती है।ं

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