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एटमी करार पर उम्मीद कायम : पीएम

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अधर में लटके भारत-अमरीका असैन्य परमाणु सहयोग समझौते की एक बार फिर पुरजोर वकालत करते हुए खेद व्यक्त किया कि यह समझौता घरेलू राजनीति का शिकार हो गया है। लेकिन उन्हें उम्मीद है कि आने वाले महीनों में इसे साकार किया जा सकेगा। ड्ढr डॉ सिंह ने कहा कि इस समझौते से भारत के राष्ट्रीय हित पूरे होते हैं तथा देश के लिए परमाणु ऊर्जा के बंद दरवाजे खुलते हैं। उन्होने कहा कि समझौते से भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर कोई विपरीत असर नही पड़ता है, न ही हमारे परमाणु कार्यक्रम में किसी देश की दखलंदाजी होती है। प्रधानमंत्री ने भारतीय विदेश सेवा के लिए चुने गए अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह समझौता परमाणु ऊर्जा और तकनीक से भारत को वंचित करने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रणाली का खात्मा करता है तथा इसके संपन्न होने पर देश अमेरिका के अलावा फ्रांस और रुस आदि के साथ परमाणु सहयोग करने की स्थिति में होगा। उन्होंने देशवासियों को आश्वस्त किया कि समझौते से भारत पर परमाणु अप्रसार संधि और व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि करने के लिए कोई दबाव नहीं पड़ता है। उन्होंने कहा कि वास्तव में इस समझौते के जरिए अमेरिका ने भारत को परमाणु हथियार संपन्न देश मान लिया है। परमाणु समझौते के बारे में सहयोगी वामपंथी दलों के विरोध की चर्चा नही करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि समझौता कठिनाईयों में फंसा है। घरेलू राजनीति के कारण हम इसे आगे नहीं बढ़ा पा रहे हैं। फिर भी हमें आशा है कि इसे साकार करने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा और यह समझौता रोशनी देख सकेगा। समझौते के भविष्य को लेकर भारत और अमेरिका में अनिश्चय की स्थिति है तथा अमेरिकी अधिकारी कई बार भारत को अंतिम समय सीमा के प्रति आगाह कर चुके हैं। कल ही अमेरिका के वाणिय एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार मामलों के सहायक मंत्री क्रिस्टोफर पेडिला ने कहा था कि समझौते का नाकाम होना भारत के लिए दुखद होगा। समझौते को लेकर सरकार और वामपंथी दलों के बीच मतभेद सुलझाने के लिए बनी समन्वय समिति की अगली बैठक 18 जून को होनी है, लेकिन वाम दल अपने रवैए को नरम करते दिखाई नही दे रहे हैं।

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