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उड़नपरियों के पर

हावत है कि ‘भारी ब्याज मूल को खाए’ इसी के परिणामस्वरूप वजनदार एयर होस्टेस को हवाई जहाज की जगह हवाई अड्डे के आफिस में डय़ूटी निभानी पड़ेगी। संस्थान में भर्ती के समय तो उड़नपरियों का वजन हल्का ही था। डय़ूटी करते-करते उनका वजन थोड़ा-बहुत बढ़ भी गया तो इसका अभिप्राय यह नहीं कि उनकी डय़ूटी की कार्यशैली ही बदल दी जाए। कहीं-कहीं तो पायलट भी सामान्य से 25 प्रतिशत एक्स्ट्रा भारी होते हैं तो क्या उनकी डय़ूटी भी बदल जाएगी। हवाई जहाज के यात्री भी भारी हो सकते हैं क्या उनको भी हवाई यात्रा से रोका जाएगा?ड्ढr राजेन्द्र कुमार सिंह, रोहिणी, दिल्लीड्ढr विश्वविद्यालय में सामाजिक अन्यायड्ढr दिल्ली विश्वविद्यालय सर्वोच्च विश्वविद्यालयों में से एक है। यहां उपकुलपति, रािस्ट्रार, डीन छात्र वेलफेयर, वित्त अधिकारी आदि के पदों पर कोई भी आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार नियुक्त नहीं है।ड्ढr इस प्रकार से कॉलेजों में एक प्रधानाचार्य, पुस्तकालयाध्यक्ष, प्रशासनिक अधिकारी तथा प्रत्येक कॉलेज में दो पद अनुभाग अधिकारी एक पद प्रशासन अधिकारी तथा दूसरा वाणिज्य का पद है। सबसे आश्चर्य की बात है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में 85 के आसपासड्ढr कॉलेज भी हैं, जिसमें किसीड्ढr भी कॉलेज का प्रधानाचार्य, प्रशासनिक अधिकारी तथा अनुभाग अधिकारी आरक्षित वर्ग से नहीं है।ड्ढr वीना नारी टांक, दिल्ली विश्वविद्यालयड्ढr अखबार नहीं, हिन्दी का शिक्षकड्ढr दैनिक हिन्दुस्तान के कलेवर में समय-समय पर हो रहे परिवर्तनों से लाखों नए पाठक इससे जुड़े हैं। हिन्दुस्तान बदलते जमाने का ऐसा समाचार पत्र है, जो हवा के रुख के अनुसार चल रहा है। पाठकों के प्रति पूर्णत: ईमानदारी, निष्ठा और सामाजिक प्रतिबद्धता से पत्रकारिता के उच्च मानदंडों पर खरा उतरते हुए हिन्दुस्तान ने अपनी चमक बरकरार रखी है। अहिन्दी भाषियों के लिए भी यह एक हिन्दी भाषा का शिक्षक है।ड्ढr दयानंद वत्स, बरवाला, दिल्लीड्ढr विकास और थर्ड सेक्सड्ढr विकास! किसका विकास, स्त्री या पुरुष का विकास। जान पड़ता है कि दुनिया स्त्री और पुरुषों दो पक्षों में बंट गई है। लेकिन इसी बीच समाज में एक महत्वपूर्ण और अभिन्न अंग है, जिसके विकास के लिए शायद ही कभी सोचा गया हो। शिक्षाविद इन्हें ‘तीसरा लिंग’ का नाम देते हैं और आम समाज इन्हें किन्नर और हिाड़ा कहता है। जिसके हिस्से में न शिक्षा है, न रोगार। मानों ये समाज के हाशिए पर हैं। उनकी शारीरिक प्रजनन अक्षमता को सामाजिक अक्षमता बना दिया गया है। आज उनको भी समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए उनके विकास की आवश्यकता है।ड्ढr इकबाल मियां, जामिया नगर, ओखलाड्ढr वामदलों की नौटंकीड्ढr पेट्रोल व रसोई गैस पर दाम बढ़ाकर केन्द्र सरकार ने महंगाई से त्रस्त जनता पर एक और प्रहार किया है। उधर वामपंथी दलों की नौटंकी से भी जनता उकता चुकी है। जब से यूपीए सरकार बनी है, वामपंथी सरकार में मलाई खाते-खाते केवल कांग्रेस को धमकी देते हैं।ड्ढr कमल कुमार जन, कैलाश नगर, दिल्लीड्ढr

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