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नरेगा में पेंच फंसाने वालों की पोल खुलेगी

राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (नरगा) की राशि कहां अटकती है और कौन अटकाता है? सरकार को अब यह पता चल जाएगा। पेंच फंसाने वाले अधिकारियों की पोल खोलने के लिए कागजी ‘स्क्रू’ तैयार कर लिए गए हैं। सरकार को उम्मीद है कि इससे इधर-उधर करने वाले हाकिमों को टाइट किया जा सकेगा। योजना के तहत सभी उप विकास आयुक्तों को अब नरगा से जुड़ी योजना की पूरी सूचनाएं क्रमवार देनी होगी। मसलन पंचायत का नाम, योजना का नाम, प्राक्कलित राशि, प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान करने वाले पदाधिकारी, प्रशासनिक स्वीकृति के प्रस्ताव प्राप्त होने की तिथि और प्रशासनिक स्वीकृति निर्गत किए जाने की तिथि का पूरा ब्योरा देना होगा।ड्ढr ड्ढr ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव अनूप मुखर्जी ने सभी उप विकास आयुक्तों और कार्यक्रम पदाधिकारियों को इस बाबत निर्देश जारी किया है। दरअसल उच्चाधिकारियों के क्षेत्रीय भ्रमण और विभिन्न स्तरों पर आयोजित बैठकों में यह बात सामने आयी थी कि योजना के कार्यान्वयन के लिए राशि देने में पदाधिकारियों द्वारा अनावश्यक देरी की जाती है। नरगा के कार्यान्वयन पर इसका प्रतिकूल असर पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त प्रशासनिक स्वीकृति के लिए प्रस्ताव प्राप्त होने पर काफी विलंब से प्रशासनिक स्वीकृति निर्गत की जाती है। योजनाओं के प्रभावित होने का यह भी एक कारण माना गया है। इस गड़बड़झाले पर अंकुश लगाने के लिए ग्रामीण विकास विभाग उपलब्ध रिपोर्ट के आधार पर यह पता लगाएगा कि राशि कहां अटकी और किसने अटकायी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वर्ष 2007-08 में नरगा के संबंध में मांगी गयी सूचनाएं अविलंब उपलब्ध कराएं। साथ ही अधिकारियों को वर्ष 2008-0में नरगा के तहत कार्यक्रम पदाधिकारी, कार्यकारी एजेंसी द्वारा राशि मांगने की तिथि, जिला कार्यक्रम समन्वयक द्वारा राशि उपलब्ध कराने की तिथि और अभ्युक्ित का मासिक ब्योरा भी प्रगति रिपोर्ट के साथ विभाग को उपलब्ध कराना होगा।

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  • Web Title: नरेगा में पेंच फंसाने वालों की पोल खुलेगी