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किसी भी विवि ने नहीं सौंपी ऑडिट रिपोर्ट

वित्तीय वर्ष 2007-08 समाप्त हुए तीन माह बीतने को हैं मगर किसी भी विश्वविद्यालय ने अपनी आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट विभाग को नहीं सौंपी है। वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतों को लेकर पहले से ही नाराज सरकार इससे और कुपित हो गई है। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों के संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाते हुए मानव संसाधन विकास विभाग ने नियमानुसार वित्तीय वर्ष समाप्त होने के फौरन बाद आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट पेश करना अनिवार्य कर दिया है। इसको लेकर विश्वविद्यालयों में अफरा-तफरी का माहौल है।ड्ढr ड्ढr हाल में शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभाग द्वारा कुलपतियों को विवि अधिनियम, 1ी धारा-53 के प्रावधानों का हर हाल में पालन की ताकीद की गई। अधिनियम में कहा गया है कि विवि को हर वर्ष नियमित रूप से आंतरिक ऑडिट कराना है। समीक्षा के दौरान पाया गया कि किसी भी विवि द्वारा अपनी लेखाओं का अंकेक्षण नहीं कराया जाता है। इसके लिए विश्वविद्यालयों के वित्तीय अधिकारियों की जमकर खिंचाई हुई। विभाग का मानना है कि इसी वजह से वित्तीय अनुशासन भंग हो रहा है जिससे विश्वविद्यालयों में खर्च संबंधी अनियमितताओं को शह मिल रही हैं। बैठक में मानव संसाधन विकास विभाग ने विश्वविद्यालयों को खुद ही ऑडिट रिपोर्ट पेश करने की समय सीमा तय करने को कहा।ड्ढr इस पर पटना, मगध और केएसडी संस्कृत विवि ने 30 जून, वीर कुंअर सिंह, बीएन मंडल, जय प्रकाश और ललित नारायण मिथिला विवि ने 30 जुलाई और तिलकामांझी भागलपुर और बीआरए बिहार विवि ने 30 अगस्त तक आंतरिक ऑडिट रिपोर्ट सरकार को सौंप देने की हामी भरी है।

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