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वैकल्पिक दवा में उपयोगी है पंचगव्य

पंचगव्य का प्रयोग देसी और वैकल्पिक दवा के रूप में किया जा सकता है। बीएयू के वेटनरी कॉलेज में देशी और टीएंडटी नस्ल के सूकरों में उनके प्रजनन और ब्लड बायोकेमिकल्स पर उसके प्रभाव पर हुए शोध में यह परिणाम उभर हैं। शोध पशुपालन विभाग के डॉ राधेश्याम राय और डॉ ओमप्रकाश पांडे ने किया। इसे गोवाहाटी स्थित राष्ट्रीय शोध केंद्र (सूकर) ने भी मान्यता दी है।ड्ढr पंचगव्य गाय का गोबर, घी, गौ मूत्र, दही और केला के मिश्रण से बनाया जाता है। इसमें मिनरल्स, विटामिन, क्रूड प्रोटीन, इयर इक्सटैक्स पाये जाते हैं। यह संतुलित आहार है। इसे जानवरों को खिलाने से मिनरल मिक्सचर देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रांची वेटनरी कॉलेज के डॉ एमपी सिन्हा और डॉ संत कुमार सिंह भी इसे लाभकारी करार देते हैं। इसका मूल्यांकन वेटनरी कॉलेज भुवनेश्वर के डॉ एसएन दास ने भी किया है। पशु चिकित्सकों के मुताबिक इसमें बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता है। यह रोगरोधी भी है। वर्तमान में कॉलेज के डीन डॉ एके सिन्हा के निर्देशन में पंचगव्य को विशेष परीक्षण के लिए लखनऊ स्थित सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीटय़ूट भेजा जा रहा है।

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