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मुकदमों का बोझ घटाता है मीडिएशन

लीगल प्रोफेशन से जुड़े लोगों को मीडिएशन का सहारा लेना चाहिए। आने वाला समय इसी का है। मीडिएशन दो पक्षों के बीच विवाद सुलझाने का सरल माध्यम है। इससे कोर्ट में मामलों का बोझ भी कम होगा। वकीलों के लिए भी यह अनिवार्य दायित्व बन गया है। ये बातें झारखंड हाइकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस एमवाइ इकबाल ने कहीं। वह 11 जून को आइआइसीएम में पांच दिनी इंटेंसिव मीडिएशन ट्रेनिंग ऑफ इस्ट इंडिया रीानल स्टेट्स के प्रशिक्षण शिविर के उद्घाटन के बाद बोल रहे थे।ड्ढr उन्होंने कहा कि मीडिएशन हमारी परंपरा रही है। विवादों का समाधान पहले लोग मध्यस्थता से ही दूर करते थे। उन्होंने कहा कि इस पांच दिनी प्रशिक्षण में लोगों को मीडिएशन के बार में सभी बातों की जानकारी मिलेगी। जस्टिस आरके मेरठिया ने कहा कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती। मेडिएशन समय की मांग है। ट्रेनर फिरदौस अली कासम करांचीवाला ने कहा कि मेडिएशन वकीलों के लिए भी लाभप्रद है। इसमें सभी मामलों का निपटारा किया जा सकता है। इसके लिए कुछ टेक्िनक की जरूरत होती है। चीन में यह काफी लोकप्रिय है। स्वागत भाषण आइआइसीएम के कार्यपालक निदेशक सुदीप घोष ने किया।ड्ढr सफल मीडिएटर के गुण बताये करांचीवाला नेड्ढr मीडिएशन के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षक फिरदौस अली कासम करांचीवाला ने न्यायिक अधिकारियों को मीडिएशन पर कई जानकारी दी। प्रशिक्षण के पहले दिन उन्होंने बताया कि किसी भी मीडिएटर का निष्पक्ष होना जरूरी है। मीडिएशन के दौरान दोनों पक्षों के अलावा किसी और को नहीं होना चाहिए। विवाद का हल निकालने के लिए उसके जड़ में जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कई ऐसे विवादों का हल निकाला गया है, जिनमें समझौते होने की संभावना नहीं थी। इस संबंध में उन्होंने कई उदाहरण भी प्रस्तुत किये। उन्होंने कहा कि मीडिएटर को सबसे पहले दोनों पक्षों को यह बताना चाहिए कि विवाद सुलझाने के दौरान क्या जरूरी हैं। इसका उल्लंघन करने पर सुनवाई बर्खास्त भी की जा सकती है।

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