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पूर्वी चम्पारण में फिर मचेगी तबाही

पूर्वी चम्पारण को तबाह करने वाली सिकरहना (बूढ़ी गंडक), गाद, तिलावे फिर कोहराम मचा दे तो आश्चर्य नहीं। इन नदियों के बांध टूटने को एक वर्ष होने को हैं पर विभागीय स्थिति यही बयां कर रही है। हालत यह है कि बाढ़ सिर पर है लेकिन काम से ज्यादा बैठकों का दौर जारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सिकरहना नदी से वर्ष 2007 में कैथवलिया, शुकुल पाकड़, डुमरी, माली, गोरीगांवा, भवानीपुर, मेहवा (सुगौली प्रखंड) में रिंग बांध टूटा। पर मरम्मत अब तक न हो सका है।ड्ढr ड्ढr इसी तरह गाद नदी से कैसर हिन्द बांध 2 किमी में टूटा जिससे लौकरिया, पीपरिया, गाद सिरसिया सहित आदि प्रभावित हुए। तिलावे का बांध सिसवा के पास करीब 100 फीट में टूटा जिससे सिसवा, लक्ष्मनवा, सेमरी सहित कई गांव प्रभावित हुए। जबकि आदापुर में बंगरी नदी का बांध नकरदेई के पास लक्ष्मीपुर तटबंध टूटा। इससे अन्हरा पकड़ी, पकड़ी, विशुनपुरवा आदि गांव प्रभावित हुए। बांध सुरक्षा व ठोकर निर्माण के नाम पर राज्य सभा सांसद कोष से करीब 10 लाख की राशि खर्च की गयी लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से फायदा न के बराबर हुआ। इस बावत रक्सौल एसडीओ अजरुन प्रसाद ने बताया कि बीडीओ, कनीय व सहायक अभियंता के साथ सव्रेक्षण कर लिखित रिपोर्ट विभाग को भेजी गई है। टूटे व कमजोर तटबंधों की समीक्षा की जा रही है जहां मरम्मत मानसून से पहले हो जाएगा।

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