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कुदाल चलाने वाले हाथों में लैपटॉप

अरे वाह! सरकार ने पीठ पर हाथ क्या रखा, ये तो उड़ चले। सर पर पगड़ी बांधे उनके एक कंधे पर कुदाल तो आज भी है लेकिन दूसर कंधे पर अब लैपटॉप भी दिखने लगा है। कुदाल चलाने वाले ये हाथ कंप्यूटर के की बोर्ड पर भी उतने सधे हुए हैं। विकास के साथ कदमताल करते हुए वे ब्लॉगिंग भी करने लगे हैं। हम बात कर रहे हैं राज्य के उन किसानों की जिनके कंधे पर सरकार ने विकास की महती जिम्मेदारी डाली है। लगता है किसानों ने अब इस चुनौती को स्वीकार कर लिया है।ड्ढr ड्ढr कैमूर जिलांतर्गत कुदरा प्रखंड के सकरी गांव में अपनी खेती खुद संभालने वाले अशोक कुमार पांडेय ने अपना ब्लॉग बनाया तो राज्य क्या देशभर के बड़े ब्लॉगरों ने उसपर अपनी टिप्पण्ी भेजी। खूब तारीफ बटोरी श्री पांडेय ने तो उनके कुछ विचार देश के कृषि वैज्ञानिकों के लिए चुनौती भी बन गये। अपने ब्लॉग ६६६.‘ँी३्रुं१्र. ु’२स्र्३.ू के माध्यम से उन्होंने सरकार को यह सलाह दी है कि ‘धान की खेती के लिए घातक हो सकती है अपना ही बीज चलाने की जिद’। उनका मतलब बिहार सहित कई राज्यों में प्रचलित नाटी मंसूरी (एमटीयू-702े बदले राजेन्द्र मंसूरी नामक प्रभेद की खेती करने की वैज्ञानिकों की सलाह से है। वे इससे इत्तफाक नहीं रखते और कहते हैं कि ‘जिसकी खेती उसकी मति’ ही चलनी चाहिए। किसान वर्षो से इससे लाभ अर्जित कर रहे हैं और वैज्ञानिकों की नई दलील उनके पल्ले नहीं पड़ रही है। पढ़ाई समाप्त करने के बाद पत्रकारिता और अब खेती से जुड़ने वाले श्री पांडेय कहते हैं कि सरकार किसानों पर सिर्फ भरोसा कर, वे उनके हाथों एक उन्नत बिहार थमा देंगे।ड्ढr इन्टरनेट पर ब्लॉग अभिव्यक्ित का एक सशक्त माध्यम बनता जा रहा है। किसान इसका लाभ उठाने लगे हैं। किसान सीधे सरकार को अपनी हर बात तो कह नहीं सकते लेकिन ब्लॉग के माध्यम से वे अपनी परशानी सरकार को बता सकते हैं। वैज्ञानिकों की भी राय आसानी से उस माध्यम से प्राप्त की जा कती है।ं

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