अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

राजनीति की शिकार हो गई करार:पीएम

डा. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार का बाहर से समर्थन कर रहे वाममोर्चा के जबर्दस्त विरोध के कारण बहुचर्चित भारत-अमेरिका परमाणु समझौते का भविष्य अधर में लटक गया है। यह बात किसी और ने नहीं खुद प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने कही है। लेकिन उन्होंने बुधवार को भारतीय विदेश सेवा के लिये चुने गये अधिकारियों को संबोधित करते हुये यह आशा भी जताई कि आने वाले महीनों में असैन्य परमाणु सहयोग के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।ड्ढr ड्ढr उन्होंने कहा कि इस समझौते से न तो भारत के परमाणु हथियार कार्यक्रम पर कोई विपरीत असर पड़ेगा और न ही हमारे परमाणु कार्यक्रम में किसी देश की दखलंदाजी होगी। इससे भारत पर परमाणु अप्रसार संधि और व्यापक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि के लिये कोई दबाव नहीं पड़ता। स्मरणीय है कि इस समझौते को लेकर सरकार ओर वाम मोर्चा के बीच मतभेद दूर करने के लिये समन्वय समिति की बैठक 18 जून को होने वाली है। प्रस्तावित बैठक से मात्र एक सप्ताह पहले प्रधानमंत्री की टिप्पणी को काफी गम्भीरता से लिया जा रहा है। डा. सिंह ने कहा कि अमेरिका के साथ परमाणु समझौता साकार होने पर हमार लिये सिर्फ अमेरिका के साथ ही नहीं बल्कि रूस और फ्रांस जसे देशों के साथ परमाणु सहयोग की नई सम्भावनायें तैयार होंगी। इससे भारत के राष्ट्रीय हित पूरे होते हैं तथा हमार देश के लिये असैन्य कार्यो में सहयोग के लिये परमाणु ऊर्जा के बंद दरवाजे खुलते हैं।

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title: राजनीति की शिकार हो गई करार:पीएम