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यातना गृह का पर्याय बने कल्याण छात्रावास

परिसर में पसरी गंदगी, जर्जर भवन व टूटी खिड़कियों से पहचान होती है आरा के अंबेडकर कल्याण छात्रावास की। आधारभूत संरचनाओं की कमी की यह कथा ही यहां के छात्रों की व्यथा है। सुविधाओं से ज्यादा विकराल समस्याएं ही इनके भविष्य को लीलने के लिए मुंह बाए खड़ी है। कतिरा स्थित एक ही परिसर में अवस्थित नए एवं पुराने कल्याण छात्रावास में कुल 37 कमर हैं और 148 सीट है परन्तु इसके विपरीत साढ़े तीन सौ से अधिक छात्र ठूंस-ठूंस कर रहते हैं।ड्ढr ड्ढr छात्रावास में रहकर पढ़ने वाले छात्र उमेश कुमार वर्मा, धजी पासवान, संजय पासवान, निरांन पासवान बताते हैं कि छात्रावास की स्थिति भयावह है। बाउंड्री टूटी हुई है। गंदगी के अंबार के कारण मच्छरों के प्रकोप से आए दिन छात्र मलेरिया की चपेट में आ जाते हैं। चार ही शौचालय है वह भी जर्जर हालत में। नित्य क्रिया के लिए उन्हें काफी परशानी झेलनी पड़ती है। कैम्पस में बोरिंग है परन्तु पाईप टूटे होने की वजह से वाटर सप्लाई वर्षो से बंद है। एक भी रसोइया नहीं है। मेस विगत आठ वर्षो से बंद है। फलस्वरूप छात्रों का आधा समय खाना बनाने में ही बीत जाता है। कुर्सी-टेबल का अभाव है। कोई नाईट गार्ड नहीं है। छात्रावास अधीक्षक महीने में शायद ही कभी आते हैं। दिलचस्प बात यह है कि छात्रावास के अधिकतर छात्र जिला कल्याण पदाधिकारी को पहचानते तक नहीं है। छात्रवृत्ति समय पर नहीं मिलती है। छात्रावास में छात्रों की क्षमता बढ़ाने के लिए अतिरिक्त भवन बनाए जा रहे हैं।ड्ढr ड्ढr क्षमता से ढाई गुणा ज्यादा छात्राएं रहने को मजबूरड्ढr अशोक प्रियदर्शी नवादाड्ढr महादलित की श्रेणी में आने वाले मुसहर, डोम, मेहतर और अस्वस्छ कार्यो में लगे अनुसूचित जाति की बालिकाओं को शिक्षित कर समाज के मुख्यधारा में लाने की सरकारी योजना भटक गई लगती है। नवादा नगर के गोंदापुर के समीप अवस्थित अम्बेदकर आवासीय बालिका उच्च विद्यालय इसका उदाहरण है, जहां रहकर पढ़ाई करना बालिकाओं के लिए दुष्कर कार्य है। 100 शय्या वाले इस आवासीय विद्यालय में 248 छात्राएं रहने को मजबूर हैं। दसवीं वर्ग की बालिका इन्दू कुमारी कहतीं हैं, कि एक ही बेड पर पांच-पांच लड़कियों के रहने से पठन-पाठन एवं सोने में काफी दिक्कते होती हैं। विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य अजरुन राम कहते हैं कि बालिकाओं को भेंड-बकरियों की तरह ठूंसकर रखे जाने से यह छात्रावास उनके लिए यातना गृह बना हुआ है। बावजूद सरकार और प्रशासन कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। वैसे तो छात्रावास के लिए 17 कमर हैं लेकिन उनमें से 5 कमर स्टोर रूम आदि में उपयोग हो रहा है। शेष 12 कमरों में ही रहना इनकी मजबूरी है। 1में उद्घाटित हुआ भवन जर्जर स्थिति में पहुंच गया है।ं

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