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पुलिस कर रही आरोपितों को बचाने का प्रयास

बेहयाई की हदों को पार कर बेबस मरीज और उनके परिजनों पर कहर बन कर टूटने वाले वारंटी जूनियर डॉक्टरों के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने से लेकर अनुसंधान तक में पुलिस पर ‘पक्षपात’ करने का आरोप लग रहा है। ताजा आरोप उस हाइकोर्ट के वकील एस. के. भारती का है जिन्होंने न सिर्फ अपनी मासूम की बेटी की जिंदगी गंवाई बल्कि डॉक्टरों के जुल्म का निशाना उनके साथ ही पत्नी और पांच वर्षीय पुत्री भी बने।ड्ढr ड्ढr भारती ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने जान बूझ कर उनके साथ हुए खूनी बर्ताव के मामले में डॉक्टरों के खिलाफ लगाये गये संगीन आरोपों को दरकिनार कर जमानतीय धाराओं के तहत दर्ज किया है। जिला बार एसोसिएशन को पत्र देकर भारती ने पुलिस की कार्यप्रणाली के साथ ही पोस्टमार्टम व कई अन्य बिंदुओं पर संदेह जताते हुए आरोपितों को बचाने की खातिर मामले को रफा-दफा करने की साजिश रचे जाने की आशंका जताई है। भारती ने कहा कि बच्ची की मौत के बाद वीएचटी मांगने पर डॉक्टरों ने जानलेवा हमला किया। आरोपितों को बचाने के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी गलत बनाया गया। रिपोर्ट में सेफ्टीसिमिया व इनफ्यूजन दर्शाया गया है। हालांकि एक बड़े शिशु चिकित्सक का कहना है कि ऐसी बीमारी वाले की सोच कभी नार्मल नहीं होती। वहीं उनकी बच्ची सामान्य थी। कौन-कौन सी दवाइयां दी, कितने इंजेक्शन लगाये गये, ऑक्सीजन कितनी मात्रा में दिया गया समेत कई बातों का जिक्र रिपोर्ट में नहीं है। भारती ने कई बिंदुओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें साजिश की बू आती है। जब बच्ची की मौत हुई तो उसका पूरा मेडिकल ऑडिट क्यों नहीं कराया गया जिससे चिकित्सक की लापरवाही या गलत इलाज का पता चल सकता था।

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