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शैक्षणिक संस्थान खुले तो सरकारी मदद

अब बिहार में वातावरण बदल रहा है। जात-पात कम हो रहा है। अब तो राजनीति में विकास पर आधारित प्रतियोगिता का माहौल है। बेरोगारों और खेत-खलिहान में काम करने वालों के बच्चे आईआईटी में प्रवेश पा रहे हैं। यही माहौल रहा तो बिहार ऊंची छलांग लगाएगा। ये बातें राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार को शहर के डॉ. जगन्नाथ मिश्र कॉलेज के रात जयंती समारोह का उद्घाटन करते हुए कहीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास को मुद्दा बनाना उनकी सफलता है। खनिज पदार्थो के खदान अलग हट गए, परन्तु बिहार के नालंदा, बिक्रमशिला, बोधगया एवं वैशाली जसे ज्ञान के केन्द्र दुनिया में दुर्लभ हैं। सरकार इन केन्द्रों को पुनर्जीवित कर रही है।ड्ढr ड्ढr मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के विश्वविद्यालयों में एक से एक शिक्षक हैं। इतने विद्वानों के रहते यहां के छात्रों को बाहर जाना पड़ता है। बिहार के लड़के कोटा जाते हैं। वहां बिहार के ही शिक्षक पढ़ा रहे हैं। शिक्षकों को छात्रों का पलायन रोकने के लिए आगे आना होगा। जो लोग बिहार में शिक्षण संस्थान खोलना चाहते हैं, उन्हें सरकार सहयोग करगी। राज्य में बीआईटी मेसरा, चाणक्य विधि विश्वविद्यालय एवं चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान की स्थापना की चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि चंद्रगुप्त प्रबंधन संस्थान में जुलाई से पढ़ाई शुरू होगी। नालंदा विश्वविद्यालय को पुनर्जीवित करने के सिलसिले में डॉ. अमर्त्य सेन के साथ तीन बैठकें हो चुकी हैं। बीआरए बिहार विवि के कुलपति डॉ. राजदेव सिंह की अध्यक्षता में आयोजित समारोह को पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. जगन्नाथ मिश्र, राज्य के लघु सिंचाई मंत्री दिनेश प्रसाद, कला संस्कृति मंत्री रणु देवी ने संबोधित किया। विधान पार्षद एवं कॉलेज के सचिव डॉॅ. महाचंद्र प्रसाद सिंह ने स्वागत भाषण दिया।ं

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