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लोगों को मार कर ही रुकेगी महंगाई!

सरकार के सभी प्रयासों के बावजूद महंगाई की रफ्तार बढ़ती ही जा रही है। फल, सब्जियों, मसालों, दाल, तिलहन, खाद्य तेल, गेहूं, दूध और कपड़ा आदि की कीमतों में बढ़ोतरी से 31 मई को समाप्त हुए सप्ताह में मुद्रास्फीति की दर 0.51 प्रतिशत और बढ़कर पिछले सात वर्ष के उच्चतम स्तर 8.75 प्रतिशत पर पहुंच गई। पिछले तीन सप्ताह से आठ प्रतिशत से ऊपर चल रही महंगाई की दर आलोच्य अवधि में दस फरवरी 2001 के 8.77 प्रतिशत के बाद की सर्वाधिक है। पिछले सप्ताह महंगाई की दर 8.24 प्रतिशत थी। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सप्रंग सरकार के कार्यकाल में महंगाई का यह नया शिखर है।ड्ढr सपं्रग सरकार के कार्यकाल में इससे पहले महंगाई का उच्चतम स्तर 28 अगस्त 2004 को 8.33 प्रतिशत था। इस बीच वाम दलों ने केन्द्र सरकार पर हमला और तेज कर दिया है। उनका कहना है कि महंगाई रोकने के लिए सरकार का रवैया काफी ढीला-ढ़ाला है और उसने बाजार की ताकतों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। दूसरी ओर रिजर्व बैंक ने महंगाई की दर को काबू करने के अपने नवीनतम प्रयासों में इसी सप्ताह रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर इसे आठ प्रतिशत किया था। 31 मई को समाप्त हुए सप्ताह में महंगाई की दर को बढ़ाने में मुख्य योगदान दूध, गेहूं, फल, सब्जियों की कीमत में एक प्रतिशत, मसालों में करीब दो प्रतिशत, तिलहनों में चार प्रतिशत, खाद्य तेलों में 1.6 प्रतिशत, शराब में साढ़े नौ प्रतिशत, कपड़ा के चार प्रतिशत और सूती धागे में नौ प्रतिशत की वृद्धि का रहा।ड्ढr नयी सूझ रहा उपाय, सोनिया चिंतितड्ढr इधर गुवाहाटी में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लगातार बढ़ रही महंगाई पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि सरकार के पास पेट्रोल के दामों में वृद्धि के सिवाय कोई चारा नहीं बचा था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। )

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