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फाइलों में करोड़ों डूबे-सूखे रहे खेत

झारखंड सरकार के दावे भले ही जो भी हों, सच यही है कि पिछले तीन साल में राज्य में एक भी हेक्टेयर अतिरिक्त जमीन तक पानी नहीं पहुंचाया जा सका। पहले से चल रही परियोजनाएं सिसक रही हैं। सरकार का दावा है कि सिंचाई क्षमता आठ से बढ़ कर 22 प्रतिशत हो गयी है, लेकिन यह हकीकत नहीं है। खजाने से करोड़ों रुपये निकल गये, लेकिन खेतों को पानी नसीब नहीं हुआ। वर्तमान जल संसाधन मंत्री कमलेश कुमार सिंह के कार्यकाल में एक भी सिंचाई परियोजना पूरी नहीं हुई है। जिन पुरानी योजनाओं को पूरा करने का दावा किया गया, वे आज भी अधूरी हैं।ड्ढr इन परियोजनाओं को पूरा होना थाड्ढr जल संसाधन विभाग के दस्तावेज के अनुसार कुल 11 सिंचाई परियोजनाओं को 2008-0तक पूरा होना था। इनमें से एक भी योजना अब तक पूरी नहीं हुई है। दिलचस्प तो यह है कि इन परियोजनाओं की लागत लगभग 1040 करोड़ रुपये थी और इन पर अब तक 761 करोड़ से अधिक रुपये खर्च भी किये जा चुके हैं। रांची जिले की सुरंगी जलाशय परियोजना पर तो अनुमानित और पुनरीक्षित खर्च से अधिक राशि खर्च की जा चुकी है। यह परियोजना 1में शुरू की गयी थी और इसे इसी साल पूरा होना है। जिन परियोजनाओं को इस साल पूरा होना था, उनमें गुमानी बराज, पुनासी जलाशय, अपर शंख जलाशय, सुरंगी जलाशय, पंचखेरो जलाशय, सुरू जलाशय, नकटी जलाशय, धनसिंहटोली जलाशय, कतरी जलाशय और कंसजोर जलाशय परियोजनाएं शामिल हैं।ड्ढr सरकारी दावे फेलड्ढr राज्य गठन के बाद अजय बराज योजना पूरी होने के तमाम तरह के दावे किये गये। उद्घाटन की तिथि तय करने की हवा उड़ायी गयी। पता चला कि कि अजय बराज का मुख्य नहर ही क्षतिग्रस्त हो गया। सीएम की पहल के बावजूद दोषी अभियंताओं पर कार्रवाई नहीं हुई। राज्य बनने के बाद सिंचाई के लिए 2870 करोड़ का प्लान बना, सब टांय-टांय फिस्स .. परियोजनाओं की सफलता के तमाम दावे खोखले हैं।ड्ढr खजाने पर पड़ा बोझड्ढr परियोजनाओं की लेट-लतीफी से सरकारी खजाने पर अब तक 78रोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ा। सिंचाई विभाग की जो योजना 1311 करोड़ 58 लाख 87 हाार रुपये में पूरी होती, अब वह 08 करोड़ रुपये में पूरी होगी। 08 करोड़ के मायाजाल का असली सच यह है कि खेत सूखे हैं और किसान मायूस।ड्ढr संसदीय कमेटी की रिपोर्टड्ढr झारखंड में सिंचाई परियोजनाओं पर केंद्रीय संसदीय कमेटी की रिपोर्ट में खाद्य उत्पादन में रिकॉर्ड गिरावट पर चिंता जतायी गयी है। झारखंड में धान, गेहूं का उत्पादन घटने की बात सामने आयी है। राज्य के किसानों को वाजिब हक मिले, इसके लिए सरकार को मास्टर प्लान बनाने की नसीहत दी गयी है।ड्ढr बिहार के समय से लेटलतीफी : कमलेशड्ढr जल संसाधन मंत्री कमलेश कुमार सिंह का कहना है कि उन्होंने झारखंड में कई बंद योजनाओं की फाइल खोली। कंस जलाशय योजना, तजना जलाशय योजना और उत्तर कोयल जलाशय योजना शुरू हो रही है। जल संसाधन विभाग में उनकेकार्यकाल में हाल के दिनों में 211 अभियंताओं को नियुक्ित पत्र बांटे गये। मंत्री ने कहा कि उन्होंने अनुकंपा के आधार पर नौकरी के विवाद को सलटा दिया है। जिसमें 456 लोगों को नौकरी मिली है। मंत्री ने कहा कि लेटलतीफी के लिए केवल वे ही जिम्मेवार नहीं हैं। बिहार के समय से लेट चल रही थीं। मंत्री ने कहा कि अजय बराज और धनसिंह टोली योजना पूरी हो चुकी है। केंद्रीय मंत्री जयप्रकाश नारायण यादव अगले महीने दोनो मेगा प्रोजेक्ट का उद्घाटन करंगे। ड्ढr

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