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कौन सच्चा कौन झूठा

बीते दिनों भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने इंदौर में कहा कि पं. नेहरू के समय से कांग्रेस झूठ बोल रही है। ऐसे में, सवाल यह उठता है कि यदि यह पार्टी झूठ बोल रही थी, तो जनसंघ ने कांग्रेस की सच्चाई को जनता के सामने लाने का काम क्यों नहीं किया? एक जिम्मेदार विपक्ष का मौका इस दल को उठाना चाहिए था। खैर, बाद में केंद्र में भाजपा के नेतृत्व में राजग गठबंधन की सरकार बनी थी। क्या इस पार्टी ने अपने सभी वायदे पूरे किए? साफ है, यदि सच्चे मन से, निस्वार्थ भाव से जनहित के काम किए जाते, तो आज देश की ऐसी स्थिति नहीं रहती। अगर कांग्रेस से गलती हुई है, तो भाजपा भी कम कसूरवार नहीं है। सत्ता और विपक्ष, दोनों के तालमेल से देश आगे बढ़ता है, लेकिन अपने यहां यह तालमेल कभी नहीं दिखा। बस आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति चलती रही।
शकुंतला महेश नेनावा, इंद्रपुरी कॉलोनी, इंदौर

सूबे की तस्वीर
उत्तर प्रदेश की सपा सरकार जनता के बीच मुफ्त पैसे बांट रही है। कभी कन्या विद्या धन के नाम पर करोड़ों खर्च किया जाता है, तो कभी मुफ्त लैपटॉप बांटे जाते हैं। अब तो मानों मुफ्त बिजली और मुफ्त सिंचाई की घोषणा बाकी है। सरकारी धन का यह अनावश्यक वितरण वास्तव में अर्थव्यवस्था की बरबादी है। लेकिन प्रदेश सरकार को इसकी चिंता नहीं है, वह तो वोट बैंक की राजनीति कर रही है। यदि मुफ्त की ये योजनाएं बंद होतीं, तो सड़कों की मरम्मत और बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पर कुछ पैसे खर्च हो पाते। किसी भी सरकार को यह समझने की जरूरत है कि पैसे मुफ्त बांटने से समाज का कल्याण नहीं हो सकता, कल्याण होगा अच्छी व्यवस्था देकर। जनता की भलाई के लिए उसे रोजगार देना होगा, उसके लिए आधारभूत व्यवस्था बनानी होगी। उसे अपनी जिम्मेदारियों का एहसास कराना होगा।
सचिन कश्यप, बुलंदशहर, उत्तर प्रदेश

पार्किंग का झगड़ा
शहरी व्यवस्था में पार्किग एक बड़ी समस्या बनकर उभरी है। एक तरफ सड़कों पर जाम है, तो दूसरी तरफ घर के सामने गाड़ी खड़ी करने की जगह नहीं है। पहले जहां खाली जगहें थीं, अब वहीं बड़ी-बड़ी इमारतें हैं। तो गाड़ी कहां लगाई जाए? पॉश कॉलोनियों में तो गलियों के अंदर गाड़ियों की कई कतारें लग जाती हैं। अगर मालूम करें, तो पता चलता है कि एक परिवार के सभी सदस्यों के लिए अलग-अलग कारें हैं। पार्किग समस्या से निपटने के दो तरीके हो सकते हैं। पहला, वाहन खरीदारों से खरीद के समय घरों में पार्किग स्थल का सर्टिफिकेट लिया जाए। दूसरा रास्ता यह हो सकता है कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था दुरुस्त की जाए। दिल्ली जैसे महानगरों के लिए यह दूसरा रास्ता अधिक कारगर और आसान है। इससे पार्किग की दिक्कत भी खत्म होगी और सड़क पर जाम की समस्या भी। लेकिन इसके लिए एक बड़ी योजना की आवश्यकता है।
वेद मामूरपुर, नरेला, दिल्ली

यह दोहरी नीति क्यों
समाजवादी पार्टी ने केंद्र की संप्रग सरकार को बाहर से समर्थन दे रखा है। अब आम चुनाव में रायबरेली और अमेठी सीट पर वह अपने उम्मीदवार नहीं उतारने की बात कह रही है। यानी इन दो सीटों पर कांग्रेस को समाजवादी पार्टी का विरोध नहीं ङोलना पड़ेगा। इससे यह लगता है कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच कुछ पक रहा है। दोनों पार्टियों के बीच किसी तरह का समझौता हो रखा है। लेकिन दूसरी तरफ, यही पार्टी कांग्रेस को देश बरबाद करने वाली पार्टी बताती है। ऐसे में, समझना मुश्किल है कि यह कैसी राजनीति है? कहीं टकराव की स्थिति, तो कहीं गुपचुप गठबंधन? यह तो जनता के साथ धोखा ही है।
धर्मपाल, बागपत, उत्तर प्रदेश

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