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ज्वेलरी डिजाइनिंग: करियर की आकर्षक मीनाकारी

ज्वेलरी डिजाइनिंग: करियर की आकर्षक मीनाकारी

कुछ वर्ष पूर्व तक ज्वेलरी डिजाइनिंग प्रोफेशन में वही लोग आते थे, जिनका बैकग्राउंड ज्वेलरी का था, लेकिन अब परिस्थितियां बदल रही हैं। अन्य क्षेत्रों के लोग भी इस क्षेत्र में आ रहे हैं। इसमें अवसरों के बारे में बता रहे हैं संजीव कुमार सिंह

अन्य कलाओं की भांति ज्वेलरी डिजाइनिंग भी एक कला है, जिसमें छात्रों को डिजाइनिंग की बारीकियों के साथ-साथ मैन्युफेक्चरिंग का काम भी सिखाया जाता है। विगत कुछ वर्षों से छात्रों के सामने इसमें व्यापक बदलाव आये हैं। आज उनके सामने जो सबसे बड़ी चुनौती है, वह नए मेटीरियल की खोज करने तथा उसे प्रयोग में लाने की है। यह ज्वेलरी डिजाइनर ही होता है, जो ज्वेलरी के पैटर्न एवं स्टाइल की प्लानिंग करता है। कई बार उसे क्लाइंट की मांग को ध्यान में रखते हुए समय सीमा के भीतर डिजाइन तैयार करना होता है। हालांकि यह काम इतना आसान भी नहीं होता, क्योंकि ज्यादातर डिजाइन पेटेंट होते हैं तथा कॉपीराइट रूपी तलवार भी ज्वेलरी डिजाइनरों के सिर पर लटकती रहती है।

बारहवीं के पश्चात खुलेगी राह
इस क्षेत्र में कोर्सों की भरमार है। सर्टिफिकेट एवं वोकेशनल कोर्स से लेकर डिप्लोमा, डिग्री, पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा, डिग्री एवं मास्टर कोर्स प्रचलन में हैं। इसके लिए जो न्यूनतम शैक्षिक योग्यता निर्धारित की गई है, वह 10+2 है। इसके पश्चात डिप्लोमा, डिग्री एवं सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। इसमें डिग्री कोर्स का फैशन कम है। छात्रों की रुचि डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स के प्रति अधिक है। इसके लिए क्रैश कोर्स भी कराए जाते हैं। पीजी लेवल कोर्स के लिए छात्रों का स्नातक होना जरूरी है। इसमें दाखिला मेरिट अथवा इंटरव्यू के आधार पर होता है।

क्रिएटिविटी आती है काम
इसमें कोर्स का प्रावधान भले ही हो, लेकिन सबसे ज्यादा आवश्यक छात्र की क्रिएटिविटी है। छात्रों को अपने अंदर सबसे पहले इस प्रोफेशन के प्रति मोह जागृत करना होगा। सटीक आंकलन, आंखों एवं हाथ के कुशल को-आर्डिनेशन तथा दिमाग को केंद्रित करके ही उत्कृष्ट डिजाइन तैयार किया जा सकता है। बाजार की समझ तथा क्लाइंट की मांग को प्राथमिकता देते हुए काम के प्रति समर्पित लोगों का यह इंडस्ट्री हमेशा से इंतजार करती रही है। जो भी नया ट्रेंड है, उसके प्रति जिज्ञासु बनने तथा उसे अपनाने की योग्यता छात्रों को आसानी से सफलता दिला सकती है।

कई तरह के कोर्स मौजूद
ज्वेलरी डिजाइनिंग के ज्यादातर कोर्स डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट के जरिए कराए जाते हैं। कुछ ऐसे भी संस्थान हैं, जो तीन वर्षीय अथवा चार वर्षीय बैचलर डिग्री प्रदान करते हैं। कोर्स के दौरान नेचर स्टडी, फ्री हैंड ड्राइंग, एलिमेंट्स ऑफ डिजाइन, सरफेस डिजाइन, इंट्रोडक्शन टू जेमोलॉजी, मेटल एंड विहेवियर, हिस्ट्री ऑफ इंडियन ज्वेलरी, डिजाइन प्रोसेस, क्रिएटिव ज्वेलरी, इलेस्ट्रेशन एंड रेंडरिंग, जेम आइडेंटिफिकेशन टूल्स आदि का विधिवत अध्ययन कराया जाता है। इस आधार पर इस क्षेत्र को अंडरग्रेजुएट, डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट में बांटा जा सकता है। कुछ कोर्सों का बाईं तरफ दी गई तालिका में विवरण दिया गया है-

पर्याप्त अवसर हैं रोजगार के
कोर्स के उपरांत कई क्षेत्रों जैसे ज्वेलरी मैन्युफेक्चरिंग, डिजाइनिंग हाउसों, एक्सपोर्ट हाउसों, डिजाइन स्टूडियो एवं वर्कशॉप में काम करने का मौका मिलता है। फ्रीलांस डिजाइनर के रूप में भी नौकरी की जा सकती है। भारत के साथ-साथ विदेशों में भी ज्वेलरी डिजाइनरों के लिए दरवाजे खुले हैं, क्योंकि भारत के डिजाइनों को अधिक पसंद किया जाता है। काम के साथ डिजाइनरों को खूब पैसा भी मिलता है। कई विदेशी कंपनियां प्लेसमेंट सेल के जरिए यहां के छात्रों को अपने देश ले जाती हैं। अधिकांश डिजाइनर अपना करियर शो रूम में अप्रेंटिस के रूप में या फेमिली बिजनेस से शुरू करते हैं।

सेलरी
एक्सपर्ट का वेतन काफी हद तक उसकी योग्यता, अनुभव एवं दक्षता पर निर्भर करता है। बतौर ट्रेनी काम शुरू करने वाले प्रोफेशनल को प्रारंभ में 12-15 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। अनुभव बढ़ने पर यह राशि बढ़ कर 30-35 हजार रुपए प्रतिमाह हो जाती है। रिटेल स्टोर्स पर ज्यादातर काम कमीशन के आधार पर होता है, इसलिए पैसे भी उसी रूप में मिलते हैं। फ्रीलांस डिजाइनरों की कमाई भी 30-40 हजार रुपए प्रतिमाह हो जाती है।

इस रूप में हैं अवसर

प्रोडक्ट डेवलपमेंट प्रोफेशनल
ज्वेलरी एंटरप्रेन्योर
मर्केडाइजर
सेल्स एंड मार्केटिंग प्रोफेशनल्स
कैड डिजाइनर
कंसल्टेंट
मैन्युफेक्चरिंग प्रोफेशनल्स

सॉफ्टवेयरों का प्रयोग
कम्प्यूटर एडेड डिजाइन (कैड) सॉफ्टवेयर का प्रयोग मैन्युफेक्चरिंग फर्म्स में प्रोडक्ट डिजाइन बनाने में किया जाता है। ज्यादातर मैन्युफेक्चरिंग कंपनियां कैड का प्रयोग ज्वेलरी के टुकड़े का वर्चुअल रियलिटी मॉडल तैयार करने में करती हैं तथा डिजाइनर अपने डिजाइन बनाने, पत्थरों को बदलने तथा अन्य महंगे कार्यों में करते हैं। यह पूरी प्रक्रिया कम्प्यूटर एडेड मैन्युफेक्चरिंग (कैम) कहलाती है। इसके द्वारा किसी भी डिजाइन के कई पीस तैयार करने में मदद मिलती है। इसके अलावा मैक एंड पीसी, तुका कैड, तुका स्टूडियो, ऑटो कैड, 3-डी मैक्स, रिवेट, स्केच अप, ज्वेल कैड, डिस्क्रीट माया, एपल एफसीपी, आईवन फ्यूजन आदि भी प्रयोग में लाए जाते हैं।

एक्सपर्ट व्यू/तु गुलाटी

सकारात्मक सोच के साथ आएं इंडस्ट्री में
ज्वेलरी डिजाइनिंग का क्षेत्र अपने पूरे ऊफान पर है तथा इसमें प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ती ही जा रही है। पहले लोग ज्वेलरी बनवाने सुनार के पास जाते थे, परन्तु अब डिजाइनिंग व मैन्युफेक्चरिंग की नई-नई विधाएं सामने आने से पूरा परिदृश्य ही बदल गया है। डिजाइन एंड इनोवेशन एकेडमी, नोएडा की ज्वेलरी डिपार्टमेंट की हेड तु गुलाटी से इस प्रोफेशन के विषय में हुई बातचीत के कुछ अंश-

मांग के मुताबिक प्रोफेशनल्स की संख्या कितनी है?
बाजार की डिमांड को देखते हुए कहा जा सकता है कि जितने प्रोफेशनल्स की जरूरत है, उतने की भरपाई नहीं हो पा रही है। आजकल आयात भी खूब हो रहा व आने वाले समय में हॉल मार्किंग की सुविधा बढ़ेगी, जिससे और लोगों की जरूरत पड़ेगी। अधिकांश प्रोफेशनल्स किसी एक संस्था से न जुड़ कर कई जगह सेवाएं दे रहे हैं, क्योंकि इसमें काम पर्याप्त है।

आने वाला दौर इस इंडस्ट्री के लिए कैसा होगा?
ज्वेलरी के प्रति मोह खत्म होने वाला नहीं है। एक्सपोर्ट का काम भी जोरों पर है। इस लिहाज से इसका भविष्य उज्ज्वल है। जो भी लोग काम को लेकर सीरियस हैं तथा डिजाइन व मैन्युफेक्चरिंग को आत्मसात कर रहे हैं, उनके लिए संभावनाओं का खुला आकाश है।

फैक्ट फाइल
प्रमुख प्रशिक्षण संस्थान

नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी (निफ्ट), नई दिल्ली
बेवसाइट
: www.nift.ac.in

पर्ल एकेडमी ऑफ फैशन, जयपुर
वेबसाइट:
www.pearlacademy.com

नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी, नई दिल्ली
इंडियन इंस्टीटय़ूट ऑफ जेम्स एंड ज्वेलरी, नई दिल्ली
ज्वेलरी डिजाइन एंड टेक्नोलॉजी इंस्टीटय़ूट, नोएडा
वेबसाइट:
www.jdtiindia.com

डिजाइन एंड इनोवेशन एकेडमी, नोएडा
वेबसाइट:
www.diaindia.co.in 

आर्क एकेडमी ऑफ फैशन आर्ट डिजाइन, जयपुर
वेबसाइट
: www.archedu.org

जेमोलॉजिकल इंस्टीटय़ूट ऑफ इंडिया, मुंबई
वेबसाइट
: www.giionline.com

फायदे व नुकसान

अपनी क्षमता दिखाने का पूरा अवसर
पहचान बनने के बाद काम की कमी नहीं
सुकून एवं शांति भरा कार्य
इंडस्ट्री के बदलावों से अपडेट न होने पर दिक्कत
मनमाफिक डिजाइन तैयार न होने पर निराशा
क्लाइंट को खुश कर पाना बड़ी चुनौती

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