DA Image

अगली स्टोरी

class="fa fa-bell">ब्रेकिंग:

होम्योपैथ: बढ़ रही है मांग

होम्योपैथ: बढ़ रही है मांग

होम्योपैथी वैकल्पिक उपचार का स्वरूप है, जिसमें रोगों के उपचार के लिए मुख्य रूप से शरीर की प्राकृतिक प्रणाली पर भरोसा किया जाता है। इसके तहत तरल कारकों को मुख्य रूप से गोली की शक्ल में रोगी को दिया जाता है, जिसका लक्ष्य शरीर की प्राकृतिक उपचार प्रणाली को जागृत करना होता है। होम्योपैथी का सिद्धांत जैसा रोग, वैसा उपचार की रीति के आधार पर होता है यानी जो दवा स्वस्थ रोगी के शरीर में विभिन्न प्रकार के लक्षण दिखा सकती है, वही रोगी के शरीर में उन्हीं लक्षणों के उपचार में भी इस्तेमाल हो सकती है। यह विधा 1700 की सदी के अंत में एक जर्मन डॉंक्टर सैम्युअल हाहेनमैन द्वारा प्रस्तावित की गई थी। होम्योपैथ रोगी का उपचार करते समय सात्विक शैली का इस्तेमाल करने पर जोर देते हैं यानी दूसरे शब्दों में कहें तो वे सिर्फ रोग नहीं, रोगी के पूरे शरीर को ठीक करने पर जोर देते हैं।

आमतौर पर होम्योपैथ रोगी के रोग के इतिहास की छोटी-छोटी जानकारी जुटाते हैं मसलन उसके व्यवहार, परिवार में रोग के इतिहास, खानपान तथा जीवनशैली के बारे में बारीक से बारीक जानकारी हासिल करते हैं। इसके आधार पर वह हर रोगी को उसकी जानकारी के आधार पर दवा की खुराक बना कर देते हैं। भारत में होम्योपैथी को लोकप्रियता बढ़ रही है, जिसकी वजह इसकी क्लीनिकल मान्यता व प्रभावशीलता, कम खर्चीला होना तथा सरकारी सहयोग है। इसीलिए होम्योपैथ की मांग तेजी से बढम् रही है और इसे लेकर कई तरह के करियर विकल्प भी सामने आ रहे हैं, जैसे शिक्षण, प्राइवेट प्रेक्टिस, रिसर्च इत्यादि।

पारिश्रमिक
सरकारी क्षेत्र में:

प्रवेश स्तर पर: 45 हजार रुपये प्रतिमाह
मध्य स्तर पर: 70 हजार रुपये प्रतिमाह
वरिष्ठ स्तर पर: 90 हजार रुपये प्रतिमाह
प्राइवेट प्रेक्टिशनर 50 हजार से लेकर एक लाख रुपये तक कमा सकते हैं। कई क्लीनिक में प्रेक्टिस करने वाले वरिष्ठ डॉंक्टरों के लिए आय की कोई सीमा नहीं है।

योग्यता एवं दक्षता
आप बेहतर श्रोता हों, उपचार को आसान बनाने के लिए शारीरिक विकारों के साथ-साथ मानसिक लक्षणों को पहचानने में भी सक्षम हों, ताकि रोगी का बेहतर व जल्द उपचार कर सकें।
बेहतर विश्लेषण क्षमता
अच्छा परामर्श देने वाला इस पेशे में कामयाबी हासिल कर सकता है।
रोगियों को रोगमुक्त करने की लगन।

कैसे हासिल करें मुकाम
कक्षा 11 व 12 में फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायोलॉजी लें और फिर हम्योपैथिक मेडिसिन तथा सर्जरी प्रोग्राम (बीएचएमएस) में बेचलर करें, जो कि न्यूनतम अनिवार्य योग्यता है। इस साढ़े पांच वर्ष के कोर्स में एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है। प्रतिष्ठित संस्थान से बीएचएमएस की डिग्री हासिल करने के बाद कई विकल्प मौजूद होंगे, जैसे शिक्षण, प्राइवेट प्रेक्टिस, रिसर्च इत्यादि। या फिर आप निम्न विषयों में विशेषज्ञता हासिल कर सकते हैं जैसे मेटेरिया मेडिका, स्टडी ऑफ होम्योपैथी ड्रग्स, ऑर्गन्स ऑफ मेडिसिन, स्टडी ऑफ होम्योपैथिक फिलॉसफी, रिपेरटरी, जो सिम्पटम्स की इंडेक्सिंग होती है, फार्मेसी, प्रेक्टिस ऑफ मेडिसिन, पीडियाट्रिक्स, साइकोलॉजी इत्यादि। विशेषज्ञता के बाद दिल्ली सरकार, दिल्ली नगर निगमों व नई दिल्ली नगर पालिका परिषद की डिस्पेंसरियों व केंद्र सरकार की स्वास्थ्य योजना, राज्य कर्मचारी बीमा निगम (ईएसआईसी) व राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन जैसे संस्थानों में मेडिकल अधिकारी के रूप में काम कर सकते हैं। या फिर होम्योपैथी में तीन साल का पोस्टग्रेजुएट कोर्स कर सकते हैं।

फैक्ट फाइल
संस्थान तथा वेबसाइट

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होम्योपैथी, कोलकाता
www.nih.nic.in
नेहरू होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, नई दिल्ली
www.nhmc.delhigovt.nic.in

बीआर सुर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, नई दिल्ली 
delhi.gov.in/wps/wcm/connect/doit_hmch/SHMCH/Home 

जेएसपीएस गवर्नमेंट होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, हैदराबाद
japosa.org/JSPSG-HMC-History.html

गवर्नमेंट होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, कालिकट
www.ghmccalicut.org

फायदे और नुकसान
रोगी का इलाज कर संतुष्टि मिलती है
सरकारी क्षेत्र में विकास की असीम संभावनाएं
आपात स्थिति में रोगों का उपचार करने में होम्योपैथी का क्षेत्र सीमित है
सर्जरी में किसी तरह की विशेषज्ञता नहीं

होम्योपैथी दुनिया में मौजूद दूसरा सबसे बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ मेडिकल सिस्टम है। लेकिन इसमें अभी काफी रिसर्च का काम होना बाकी है।
डॉं. प्रवीन राज पी, प्रोफेसर, फादर मुलर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज, मंगलौर

  • Hindi Newsसे जुडी अन्य ख़बरों की जानकारी के लिए हमें पर ज्वाइन करें और पर फॉलो करें
  • Web Title:होम्योपैथ: बढ़ रही है मांग