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‘काम का ब्योरा नहीं देती कांग्रेस’

‘काम का ब्योरा नहीं देती कांग्रेस’

एनडीए के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा उनकी प्राथमिकता है। उनकी सरकार बनी तो वह इसे अवश्य देंगे, बशर्ते बिहार के अहंकारी नेता जनभावनाओं का आदर कर उसे स्वीकार करें। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का नाम लिए बगैर कहा कि उनका अहंकार एवरेस्ट से भी ऊंचा है।

पूर्णिया के रंगभूमि मैदान में सोमवार को हुंकार रैली में मोदी ने कहा कि नमो ने कहा कि बिहार में हमारा 17 साल पुराना गठबंधन था, लेकिन एक अंहकारी शासक ने यहां की जनता की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर उसे तोड़ दिया। कारण भी ऐसा कुछ नहीं प्रतीत हो रहा? वह तो चार-पांच दिन पूर्व उन्होंने खुद खुलासा कर दिया कि वह भी प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। मोदी ने अपने भाषण के दौरान जनता से कई बार सीधे संवाद किया और अपने तर्कों से जनता की हामी भी भरवाई। जनता से संवाद के दौरान मोदी ने लोगों की तालियां भी खूब बटोरी।

उन्होंने बिहार से अपना लगाव और नाते का हवाला देते हुए कहा कि जब कोसी विभीषिका आई तो यह तीसरा मोर्चा कहां था? गुजरात के लोगों ने कुछ मदद भेजी तो यहां के अहंकारी नेता ने उनकी भावनाओं को चोट पहुंचाई और उसे ठुकरा दिया। मोदी ने कहा कि कुछ लोग किसी को (मुझे) बिहार में रोकने की बात कर रहे हैं। हालात यह हो गए हैं कि अब गाय-भैंसें भी सोच रही हैं कि कहीं यहां के लोगों ने चुनाव में भूल कर दी तो उन्हें चारा मिलेगा या नहीं। बिहार में मध्याह्न भोजन खाने से बच्चों की मौत हो जाती है और कुछ नहीं होता। बिहार में यहां पानी की कमी नहीं है फिर भी मछुआरे भाई कंगाल हैं।

मोदी ने कहा कि कांग्रेस के शहजादे कहते हैं कि हमने आईटी क्षेत्र में विकास किया। दस साल में हमने मोबाइल दिया। पर उन्हें कौन ये बताए कि मोबाइल चार्ज करने के लिए लोगों को दूसरे गांव जाना होता है, बिजली है ही नहीं। नरेन्द्र मोदी ने कहा कि कुछ लोग सेक्ल्यूरिज्म की बात करते हैं। लेकिन आंकड़े बताते हैं कि उन्होंने इस शब्द के नाम पर अल्पसंख्यकों को सिर्फ छला है।

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