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पायलट बनने के लिए लेनी होगी ट्रेनिंग

पायलट बनने के लिए लेनी होगी ट्रेनिंग

मेरे एक रिश्तेदार की उम्र बीस साल है। उन्होंने पिछले साल अपनी मां को खो दिया था। उनकी मां सरकारी अस्पताल में हैल्थ सुपरवाइजर थीं। नियमों के मुताबिक उनके आश्रित होने के नाते वे अस्पताल में नौकरी पाने के हकदार हैं। उन्होंने नेशनल ओपन स्कूल से इस साल इंटरमीडिएट पास किया है। हम यह जानना चाहते हैं कि नेशनल ओपन स्कूल से प्राप्त मार्कशीट और सर्टिफिकेट की मान्यता सरकारी स्कूल से पास होने के बाद प्राप्त मार्कशीट और प्रमाणपत्र के समान ही होती है क्या?                         एक पाठक
हां, सभी व्यवहारिक उद्देश्यों के लिए एनआईओएस सर्टिफिकेट की मान्यता किसी भी सरकारी स्कूल से प्राप्त सर्टिफिकेट के समकक्ष ही मानी जाती है, जब तक कि इसके बारे में कोई संस्थान विशेष तौर पर उल्लेख न करे। वैसे भी नेशनल इंस्टीटय़ूट ऑफ ओपन स्कूलिंग मानव संसाधन मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाला स्वायत्त संस्थान है, इसलिए कई एजुकेशनल बोर्डस द्वारा प्रदान किए जाने वाले सर्टिफिकेट की ही तरह इसके द्वारा मिलने वाला सर्टिफिकेट भी अमूमन हर जगह मान्य होता है।

मैंने पीसीएम के साथ बारहवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण की है। मैं एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनना चाहता हूं। मुझे इसकी प्रवेश प्रक्रिया और यह डिग्री प्रदान करने वाले कुछ संस्थानों के बारे में जानकारी देने की कृपा कीजिए।
आसिफ

आज के दौर में एविएशन सेक्टर में बहुत तेजी से विकास हो रहा है। नए-नए विमान आ रहे हैं और नए हवाई मार्ग भी खोले जा रहे हैं। ओपन स्काई पॉलिसी के तहत इस फील्ड में तमाम नए ऑपरेटर्स आ रहे हैं, जो नई—नई एयरलाइंस खोल रहे हैं। घरेलू विमान मार्गो के अतिरिक्त अब भारत से कई इंटरनेशनल हवाई मार्गों पर भी फ्लाइट्स भेजी जा रही हैं।

एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर बनने के लिए आपको डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन यानी डीजीसीए से लाइसेंस लेना होता है। एसोसिएट मेंबरशिप एग्जाम (एएमई) सर्टिफिकेट कोई डिग्री नहीं है, बल्कि यह एयरक्राफ्ट की सर्विस और मेंटेनेंस के लिए किया जाने वाला स्पेशलाइज्ड लाइसेंसिंग प्रोग्राम है। डीजीसीए द्वारा मान्यताप्राप्त संस्थान ही इस क्षेत्र का प्रशिक्षण दे सकते हैं। यह प्रोग्राम एयरोनॉटिकल सोसायटी ऑफ इंडिया द्वारा संचालित किया जाता है। इस प्रोग्राम के आंतरिक एग्जाम यानी ए और बी सेक्शन पास करने के बाद डीजीसीए आपको एएमई लाइसेंस जारी कर देता है। इसके लिए न्यूनतम योग्यता दसवीं होती है।

अगर आपने पीसीएम के साथ बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण की है तो आप सीधे सेक्शन ए के योग्य हो जाते हैं। इसके लिए आयु सीमा 23 वर्ष की है। इंजीनियरिंग डिप्लोमा धारकों और साइंस ग्रेजुएट्स के लिए इसमें छूट मिलती है। वैसे कई फ्लाइंग क्लब्स के साथ भी प्रशिक्षण संस्थान जुड़े हुए हैं, लेकिन उनमें से कुछ ही हैवी एयरक्राफ्ट और जेट इंजन्स की ट्रेनिंग देते हैं। उनमें से अधिकांश छोटे एयरक्राफ्ट और पिस्टन इंजन्स की ही ट्रेनिंग देते हैं, इसलिए जब किसी संस्थान से जुड़ें तो एक बार यह जरूर चेक कर लें कि वे किस तरह के विमानों का प्रशिक्षण देने में सक्षम है और उसके पास कौन-कौन सी आधुनिकतम सुविधाएं हैं। यह भी सुनिश्चित कर लें कि संस्थान डीजीसीए (www.dgca.nic.in) की वेबसाइट पर है या नहीं।

तीन साल के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के पहले साल यानी दो सेमेस्टर पूरे हो जाने पर आप एएमई का बेसिक    पेपर-1 दे सकते हैं, दूसरे साल की समाप्ति पर पेपर- 2 दे सकते हैं और ढाई साल यानी पांचवें सेमेस्टर  के बाद पेपर-3 दे सकते हैं। तीनों पेपर पास करने के बाद आपको डीजीसीए से बेसिक एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस इंजीनियर सर्टिफिकेट मिलता है, जिसके बाद आप एविएशन इंडस्ट्री में काम करने के योग्य हो जाते हैं।

उसके बाद चौथे पेपर को अपने स्पेसिफिक एरिया में करने के बाद आप एएमई लाइसेंस पाने के हकदार हो जाते हैं। इस कोर्स के अंतर्गत आपके फ्लाइट एयरोडायनेमिक्स, वर्कशॉप टेक्नोलॉजी, मेटालर्जी, इलेक्ट्रॉनिक्स, जेट इंजीनियरिंग आदि के बारे में पढ़ाया जाता है। वैसे आप किसी मान्यताप्राप्त विश्वविद्यालय से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में बीई या बीटेक भी कर सकते हैं। इसके तहत आपको एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और उसके कंपोनेंट्स के बारे में बताया जाता है।

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