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वानिकी विविः जमीन पर फंसा पेंच, विकल्पों की तलाश

गैरसैंण। अवतार सिंह नेगी। ब्लॉक के हरगढ़ में स्वीकृत उत्तराखंड औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार की शाखा खोलने के लिए चयनित भूमि पर फिलहाल पेंच फंस गया है। गांव में विवि की शाखा खोलने के लिए प्रस्तावित भूमि गोचर (चरागाह) के नाम दर्ज है, जिस पर किसी भी प्रकार का निर्माण निषेध है।

इसी संबंध में रविवार को यहां पहुंचे विवि के डीन बीपी नौटियाल एवं वैज्ञानिक एचएस बिष्ट सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने हरगढ़, धारापानी, नागार्जुन सैंण व हिसलांणी में भूमि उपलब्धता के बावत विकल्पों की खोज की।

विवि के डीन बीपी नौटियाल ने कहा कि यहां शाखा खुलने से काश्ताकारों को कृषि, उद्यान एवं पारंपरिक खेती में बदलाव के बावत आधुनिक जानकारियां मिल सकेंगी, जिससे पैदावार में इजाफा होगा। इसके साथ ही बेरोजगार युवकों को वानिकी एवं औद्यानिकी में डिप्लोमा भी मिलेगा।

विवि की शाखा खोलने के लिऐ लगभग दौ सौ नाली केशरहिंद या नाम लैंड की आवश्यकता होगी, जिसमें शाखा विवि की प्रशासनिक एवं शैक्षिक गतिविधियां चल सकें। निजी भवन से संचालित हो रही विवि शाखा विगत चार माह पूर्व स्वीकृत औद्यानिकी एवं वानिकी विवि भरसार की शाखा की कक्षाएं वर्तमान में मेहलचौंरी में एक निजी भवन से संचालित की जा रही है।

वर्तमान में 22 युवक यहां से उद्यान में एक वर्षीय डिप्लोमा हासिल कर रहे हैं। इनका कहना है.हरगढ़ क्षेत्र के राजस्व उपनिरीक्षक विजयपाल गुसांई का कहना है कि राजस्व अभिलेख में हरगढ़ ग्राम पंचायत द्वारा प्रस्तावित 200 नाली भूमि गौचर-पनघट के नाम पर दर्ज है, जिस पर मा सुप्रीम कोर्ट के निर्णय अनुसार निर्माण कार्य प्रतबिंधित है।

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