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दागियों के केस सालभर में निपटाएं

सुप्रीम कोर्ट ने देश की निचली अदालतों को आदेश दिया है कि वे आपराधिक मामलों में संलिप्त मौजूदा सांसद-विधायकों की सुनवाई में तेजी लाएं। कोर्ट ने सोमवार को ऐसे मामलों में फैसला सुनाने के लिए निचली अदालतों के लिए एक साल की समयसीमा निर्धारित की है।

न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने आदेश में कहा, ‘मौजूदा सांसदों-विधायकों से जुड़े मामलों को प्रतिदिन सुनवाई के आधार पर खत्म किया जाए। यदि  सुनवाई एक साल के भीतर पूरी नही होती है तो निचली अदालत को इसका कारण अपने प्रदेश की हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को बताना होगा।

अगर इस कारण से चीफ जस्टिस संतुष्ट होते हैं तो वह फैसला सुनाए जाने की निर्धारित समयसीमा बढ़ा सकते हैं।

जनहित याचिका पर आदेश : शीर्ष अदालत ने ‘पब्लिक इंटरेस्ट फाउंडेशन’ नाम की एनजीओ द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर यह आदेश दिया है। याचिका में सांसदों की संलिप्तता वाले मामलों की सुनवाई में तेजी लाने के आदेश देने की अपील की गई थी। इस फैसले से सांसदों-विधायकों से जुड़े ऐसे मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी, जिसमें दो साल से ज्यादा की सजा का प्रावधान होगा।

विधि आयोग से ली थी राय : सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर पर विधि आयोग की राय ली थी। आयोग के अनुसार आरोप सिद्ध होने पर ही उम्मीदवार को अयोग्य घोषित करना चाहिए। दोष सिद्ध होने पर अयोग्य घोषित करने से राजनीति में अपराधियों को नहीं रोका जा सकेगा।  चुनाव सुधार के मुद्दों पर आयोग ने यह रिपोर्ट सोमवार को ही कोर्ट को सौंपी है।

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