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सच का इंतजार

इस संपादकीय के लिखे जाने तक मलयेशियाई एयरलाइंस के विमान एमएच 370 का कुछ पता नहीं चल सका है। गए शनिवार क्वालालंपुर से बीजिंग के लिए उड़ान भरने के लगभग एक घंटे बाद यह लापता हो गया और अब तो रडार स्क्रीन से इसको गायब हुए 48 घंटे से अधिक हो चुके हैं। हम अधिक से अधिक 239 यात्रियों की सलामती और सुरक्षित वापसी की कामना कर सकते हैं। लेकिन इसके अलावा, कुछ ऐसे अंधेरे कोने हैं, जिन पर देर-सबेर रोशनी डाली जानी चाहिए।

सुरक्षित उड़ान भरने में मलयेशियाई एयरलाइंस का अपना कीर्तिमान है। 1995 में विमान दुर्घटना हुई थी। गए शनिवार की घटना के बाद वियतनामी वायुसेना के विमानों ने पता लगाया है कि जहां से मलयेशियाई विमान गायब हुआ था, वहां के तटीय इलाके में तेल के दो निशान मिले हैं। लेकिन विमान का कोई सबूत अब तक नहीं मिला है। यदि कोई हादसा हुआ है, तब भी ठीक-ठीक भौगोलिक स्थिति को जानने में समय लग सकता है। यदि हादसा नहीं हुआ है, तो कहा जा सकता है कि विमान का किसी ने अपहरण किया है।

जांचकर्ता इस आशंका के कोण से भी काम कर रहे हैं, खासकर तब से, जब यह मालूम चला है कि विमान में दो यात्री ऐसे थे, जिन्होंने यूरोपीय नागरिकों के पासपोर्ट चुराए और उनका इस्तेमाल किया। चूंकि विमान में चीनी यात्रियों की तादाद सबसे अधिक थी, इसलिए यह भय स्वत: उत्पन्न होता है कि चीन की सरकार को सबक सिखाने के लिए यह हाईजैक किया गया हो। बीते दिनों चीन के युन्नान प्रांत में एक नरसंहार में 29 लोग मारे गए और 143 लोग घायल हुए। चीन के प्रशासन का दावा है कि अलगाववादी इस तरह की हिंसा को अंजाम दे रहे हैं और ये शिनजियांग के सुदूर पश्चिमी क्षेत्र से आते हैं। अक्तूबर 2013 में बीजिंग ने यह आरोप लगाया था कि इन्हीं ताकतों ने त्यानमेन चौराहे पर आत्मघाती हमले को अंजाम दिया था।

तिब्बती के अलावा, बीजिंग के सामने शिनजियांग का अल्पसंख्यक समुदाय भी एक चुनौती है। इस लिहाज से देखें, तो विमान का लापता होना अपहरण की कार्रवाई हो सकती है।

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