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कांग्रेस-एनसीपी के लिए कड़ी चुनौती

कांग्रेस-एनसीपी के लिए कड़ी चुनौती

इस बार के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस एनसीपी को महाराष्ट्र में कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी। अपनी पुरानी सीटों को बचाए रखने के लिए भी उन्हें खासी ताकत लगानी होगी। कांग्रेस-एनसीपी को सिर्फ शिवसेना-भाजपा के गठबंधन से ही मुकाबला नहीं करना है, बल्कि उसे परेशानी में डालने के लिए आम आदमी पार्टी भी एक मजबूत कड़ी के रूप में खड़ी होने वाली है।

मनसे के कमजोर पड़ने और दलित व खासकर मुंबई में उत्तर भारतीय वोटों के बंटने की संभावना से भी कांग्रेस-एनसीपी के सामने चुनौतियां बढ़ सकती हैं। कांग्रेसी सूत्र मानते हैं कि राज ठाकरे की पार्टी मनसे की पकड़ मराठियों पर कमजोर हो जाने से ज्यादा नुकसान उन्हें ही हो सकता है।

इसके अलावा दलित वोट आर पीआई के रामदास आठवले की वजह से शिवसेना-भाजपा गठबंधन की तरफ जा सकते हैं। क्योंकि, दलितों पर प्रकाश आंबेडकर और राजेंद्र गवई का जनाधार कमजोर पड़ रहा है।

शिवसेना-भाजपा गठबंधन को स्वाभिमानी शेतकरी संगठन के राजू शेट्टी भी मजबूत कर रहे हैं। किसानों में उनकी पैठ को देखते हुए एनसीपी ने हातकंणगले सीट को कांग्रेस को देकर रायगड की सीट मांग ली है। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की भी हवा यहां है।

लेकिन कांग्रेस और एनसीपी को अपने पारंपरिक वोटों पर बहुत ज्यादा भरोसा है। बावजूद इसके कांग्रेस-एनसीपी को भ्रष्टाचार और महंगाई का मुद्दा भारी पड़ सकता है। अगर पुणे और नांदेड़ में कांग्रेस ने दागी नेताओं को मैदान में उतारा तो छवि को मुद्दा बनाकर शिवसेना-भाजपा अपना रास्ता आसान बनाने की हरसंभव कोशिश करेंगी।

सूत्रों का कहना है कि इस बार सीटों  के बंटवारे में एनसीपी ने शुरू में कांग्रेस पर दबाव बनाने का प्रयास जरूर किया था। मगर जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आ रहा है एनसीपी के मुखिया शरद पवार भी नरम दिख रहे हैं।

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