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गुस्से में लोग, कांग्रेस-नेकां को कर सकते हैं खारिज

गुस्से में लोग, कांग्रेस-नेकां को कर सकते हैं खारिज

जम्मू कश्मीर की सर्द वादियों में लोकसभा की सरगर्मी अभी बढ़ने वाली है। वहीं राज्य में इसी साल अक्तूबर तक विधानसभा के भी चुनाव होने वाले हैं। हालांकि चुप्पी के माहौल में घाटी के लोगों में सत्तारुढ़ दलों को
लेकर गुस्सा देखा जा सकता है। गुस्से का प्रमुख कारण सेना का पाथर बल एनकाउंटर केस को बंद करने का फैसला है। 25 मार्च 2000 को सुरक्षा बलों ने 5 ग्रामीणों की हत्या कर दी थी।

सेना का दावा है कि वे विदेशी आतंकी थे। वहीं एक साल पहले संसद पर हमले में दोषी करार अफजल गुरु फांसी दिए जाने के बाद भी घाटी के लोगों में कांग्रेस नेकां सरकार के खिलाफ गुस्सा है, जो 2014 के लोकसभा चुनाव में कई गणनाओं को झुठला सकता है। 2009 के चुनाव में नेकां और कांग्रेस अलग लड़े थे पर बाद में उन्होंने सर कार बनाने के लिए गठबंधन किया था।

इस चुनाव में भी दोनों दल अलग-अलग लड़ सकते हैं। नेकां और कांग्रेस में दरार भी है। पर मह बूबा मुफ्ती की अगुवाई में पीडीपी की भाजपा से बढ़ती नजदीकियां कांग्रेस और नेकां को करीब बनाए रख सकती हैं। एक दिसंबर को जम्मू में हुई ललकार रैली में भाजपा के पीएम पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने दोनों दल कांग्रेस और नेकां को आडे़ हाथ लिया था। जबकि उन्होंने पीडीपी पर नरमी बरती थी।

पिछली बार की बात करें तो परंपरागत हिंदू वोटरों ने कांग्रेस को वोट दिया था। जबकि इस बार ओपिनियन पोल भाजपा के जीतने की भविष्यवाणी कर रहे हैं। जम्मू और उधमपुर सीट पर भाजपा की स्थिति मजबूत दिखाई देती है पर बाकी की चार सीटों पर राहुल गांधी और मोदी का जादू कितना चलेगा ये देखना होगा। अक्तूबर में होने वाले विधानसभा चुनावों में विकास, नौकरी, भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे प्रभावी हो सकते हैं।

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