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चुनाव खर्च में ही जुड़ेगा सोशल मीडिया का प्रचार

चुनाव खर्च में ही जुड़ेगा सोशल मीडिया का प्रचार

फेसबुक, टिवटर, वेबसाइट और ब्लॉग पर चुनाव आयोग का पहरा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक यदि दिल्ली की आबादी की तुलना में यहां पंजीकृत मोबाइल की संख्या को आंका जाए तो यहां एक व्यक्ति के पास दो से तीन मोबाइल हैं। ये मोबाइल सोशल मीडि या का सबसे बड़ा हथियार हैं और राजनीतिक दलों को सीधे युवाओं से जोड़ रहे हैं।

इसलिए आयोग ने इस पर पहरा सख्त कर दिया है। आयोग का कहना है कि इस मद में होने वाला खर्च भी संबंधित दलों के चुनाव खर्च में शामिल कि या जाएगा। इसके लिए एक विस्तृत गाइड लाइन चुनाव आयोग ने तैयार की है। इस गाइड लाइन का आधार 2004 में हुए सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को बनाया गया है। जिसमें यह सुनिश्चित करना है कि सोशल साइट के माध्यम से सभी दलों के माध्यम से होने वाला खर्च भी चुनाव खर्च में शामिल कि या जाए।

विशेष टीमों का हुआ गठन:
आचार संहिता लग गई है और इससे पहले से ही राजनीतिक दल सोशल साइटों पर सक्रिय है। इसलिए आयोग ने भी इसकी निगरानी बढ़ा दी है। चुनाव आयोग के पास इस काम के लिए एक विशेष टीम बनाई गई है जो राजनेताओं, राजनीतिक दल द्वारा बनाई गई वेबसाइटों पर जाकर निगरानी कर रहे हैं।

आयोग के मुताबिक इस बाबत अक्टूबर 2013 में विस्तृत गाइड लाइन तैयार की जा चुकी है। सोशल मीडिया से होने वाले प्रचार को इलैक्ट्रानिक प्रचार की श्रेणी में रखा गया है। यदि कोई उल्लंघन होता है तो इन्हीं नियमों के तहत कार्रवाई की जा सकता है।

क्या होती है प्रक्रिया:
पार्टी स्तर पर होने वाले प्रचार के लिए चुनाव आयोग की मुख्य समिति से मंजूरी दी जाती है। समिति को बताना होता है कि किसी भी प्रचार को करने पर पार्टी कितना पैसा खर्च कर रही है और इसके लिए प्रयोग की जा रही टीम के लिए कितना खर्च किया जा रहा है।

चुनाव खर्च में होगा शामिल: इसे पार्टी के चुनाव खर्च में शामिल किया जाता है। बताया जा रहा है कि बीते
विधानसभा चुनावों में भाजपा ने सोशल मीडिया प्रचार के लिए 15-16 आवेदन किए थे जिन्हें नियमानुसार स्वीकार किया गया था।

फार्म 6 भरकर जोड़ें नाम:

जिन मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में दर्ज न हुए हों, किसी कारणवश नाम सूची से कट गए हों और पंजीकृत न हुए हों, वे सत्यापन शिविर में फार्म 6 भर कर इन कमियों को दूर कर सकते हैं।

कैसे होती है जांच

पार्टी के लिए सोशल एकाउंट की निगरानी आयोग ने शुरू कर दी है लेकिन जब प्रत्याशी नामांकन करेंगे तोउनकी निगरानी शुरू होगी। नए फार्म में यह प्रावधान है कि प्रत्याशी को नामांकन के वक्त अपने सोशल मीडिया एकाउंट की जानकारी देनी होगी।

इस एंकाउट मिलने के बाद आचार संहिता लागू होने के बाद की स्थिति जांची जाती है। उल्लंघन मिलने पर कार्यवाही की सिफारिश की जाती है। ऐसा ही मामला विधानसभा चुनाव में आया था जब विधायक जगदीश मुखी को नोटिस भेजा गया था।

कैसे मिलती है सोशल प्रचार की मंजूरी

प्रत्याशी को सेक्शन 77 के तहत अपने चुनाव खर्च का हिसाब देना होता है। इसी प्रावधान में सोशल मीडिया की निगरानी है। इसके लिए प्रत्याशी को जिला उपायुक्त की अध्यक्षता में बनी कमेटी के समक्ष आवेदन करना होता है।

कमेटी को खर्च से संबंधित जानकारियां देनी होती है और यदि इस कमेटी की मंजूरी के बिना प्रचार होता है तो उसे आचार संहिता का उल्लंघन माना जाता है ।


कितना खर्च कर सकता है प्रत्याशी

लोक सभा चुनावों के लिए आयोग ने खर्च की सीमा 70 लाख रुपये निर्धारित की है। कोई भी प्रत्याशी इससे अधिक धनराशि खर्च नहीं कर सकता। यदि कोई प्रत्याशी अधिक खर्च करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सकती है। नियमानुसार उस प्रत्याशी को पार्टी की सदस्यता तक छोड़नी पड़ सकती है।

रविवार को जुड़े इतने मतदाता

जिला मतदाता
उत्तरी 12,036
पश्चिम 14,405
दक्षिण पश्चिम 23,500
मध्य 9866
दक्षिण 17904
उत्तर पश्चिम 22000
पूर्व 22039


एक दिन में डेढ़ लाख नए मतदाता जुड़े

दिल्ली भर में 2500 कें द्रों पर एक ही दिन में 1.5 लाख नए मतदाताओं ने फार्म 6 दर्ज कराया है। अधिक से अधिक मतदाताओं को लोक सभा चुनावों से पहले जोड़ा जा सके। इसके लिए दिल्ली भर में विशेष मुहिम चलाई थी।

इसके अतिरिक्त आयोग ने इन केंद्रों पर मतदाता सूचियां भी उपलब्ध कराई थी ताकि ऐसे मतदाता जिनके मतदाता सूची में नाम नहीं हो वे तत्काल अपने आवेदन कर सकें। आयोग की योजना के मुताबिक 12 अप्रैल तक जिन भी मतदाताओं से आवेदन आएंगे, उन नामों को इस बार के लोक सभा सीट के लिए स्वीकार किया जाएगा।


मतदाता सूची सत्यापन अभियान शुरू

इस बीच रविवार को राजधानी स्थित मतदान केन्द्रों पर सत्यापन शिविर का आयोजन कर मतदाता सूची में सत्यापन और पंजीकरण सहित अन्य कमियों को दूर करने का अभियान शुरू हुआ। इसके तहत दिल्ली स्थित 11763 मतदान केन्द्रों पर इस अभियान के तहत सत्यापन शिविर चलाए गए।

मध्य जिला से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिले के 1056 मतदान केन्द्रों पर मतदाताओं ने बढ़चढ़कर अभियान में हिस्सा लिया और मतदाता सूची में दर्ज रिकॉर्ड का सत्यापन कराया।

जिला चुनाव अधिकारी आशिमा जैन ने बताया कि इस दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने, दर्ज आंकड़ों में संशोधन करने, पंजीकरण कराने और इसे अपडेटकर ने में मतदाताओं की बीएलओ स्तर के अधिकारियों ने मदद की।

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