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कंझावला में बुनियादी सुविधाओं का इंतजार जारी

नई दिल्ली। तत्कालीन मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा द्वारा कंझावला गांव एक्सटेंशन को विकास के मानचित्र पर लाने के लिए बनाया गया ताना-बाना पूरी तरह से बिखर चुका है। सत्रह साल पहले भाजपा की सरकार जाने के साथ बाहरी दिल्ली स्थित इस इलाके का विकास भी फाइलों में दब गया। नौ साल पहले हाईकोर्ट ने भी इस इलाके में बुनियादी जनसुविधाएं मुहैया कराने का आदेश दिया था।

इसके बावजूद यहां विकास के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगी। 27.21 करोड़ रुपये मिलने के बाद भी नगर निगम ने विकास कार्य नहीं कराया। दिल्ली सरकार पर 15 साल तक काबिज कांग्रेस सरकार और सात साल से निगम पर काबिज भाजपा ने इस इलाके की उपेक्षा की। कुछ लोगों ने यहां घर तो बनाया है लेकिन बुनियादी सुविधाओं के अभाव में वे अपने घरों में नहीं रह पाते हैं। यहां पक्की सड़क, सीवर, नालियों की बात तो दूर बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं हैं।

हाईकोर्ट ने अब एक बार फिर इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए दिल्ली सरकार, नगर निगम एवं अन्य संबंधित निकायों से जवाब तलब किया है। जस्टिस मनमोहन ने सरकार और नगर निगम से यह बताने के लिए कहा है कि आखिर अब तक कंझावला गांव एक्सटेंशन में बुनियादी सुविधाएं मुहैया क्यों नहीं कराई गई। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को हलफनामा दाखिल कर यह भी बताने के लिए कहा है कि यहां पर विकास का खाका खींचने में और कितना वक्त लगेगा।

हाईकोर्ट ने यह आदेश कंझावला निवासी अनिल कुमार की ओर से दाखिल याचिका पर दिया है। याचिका में सरकार और नगर निगम पर कंझावाला गांव एक्टेंशन के विकास कार्यो की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधविक्ता अभिमन्यु गर्ग ने हाईकोर्ट से वर्ष 2005 के आदेशों के तहत गांव का विकास कार्य शुरू करने की मांग की। उन्होंने कहा है कि हाईकोर्ट के आदेश के नौ साल बीत जाने के बाद भी कंझावला गांव एक्टेशन में जरूरी बुनियादी सुविधाएं बहाल होना तो दूर अभी काम शुरू भी नहीं हो पाया है।

बिजली लगाने का काम तो शुरू हुआ, पर खर्च उपभोक्ताओं से वसूला जा रहा हैकंझावला एक्सटेंशन में एनडीपीएल ने अब बिजली लगाने का काम शुरू किया है। इसके लिए खम्भे और तार लगाने का काम चल रहा है। लोगों का आरोप है कि एनडीपीएल बिजली के खम्भे और तार लगाने की कीमत उपभोक्ताओं से वसूल रही है। क्या था हाईकोर्ट का आदेशहाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर कंझावला गांव एक्सटेंशन में बिजली पानी, सड़क, सीवर और अन्य जरूरी मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का आदेश दिया था।

हाईकोर्ट ने यहां के विकास के लिए कार्ययोजना तैयार कर उस पर अमल कराने के लिए दिल्ली सरकार के एक संयुक्त सचवि को नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया था। संयुक्त सचवि की अगुवाई में कंझावला के विकास के लिए हाईकोर्ट के आदेश के चार साल बाद कार्य योजना तैयार कर सरकार ने हलफनामा भी पेश किया। इसके बावजूद जमीनी तौर पर आज तक विकास कार्य शुरू नहीं हो पाया है। प्लॉट आवंटन के सात साल बाद तक जब विकास कार्य शुरू नहीं हो पया तो यहां के लोगों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

क्या थी कार्य योजना- बिजली- दसिंबर, 2008 में यहां पर बिजली सुविधा मुहैया कराने के लिए 66 किलोवाट का ग्रिड और 11 किलोवाट का सब-स्टेशन बनाने का निर्णय लिया गया। - सीवर, पानी की लाइन और सड़क- कार्य योजना के तहत कंझावला गांव एक्सटेंशन में सीवर, पानी की लाइन, पक्की सड़कें बनाने का काम जुलाई, 2009 में शुरू कर मार्च, 2010 तक 50 फीसदी और दसिंबर 2010 तक पूरा किया जाना था। लेकिन आज तक काम शुरू भी नहीं हो पाया है।

- विकास कार्य के लिए 6 साल से करोड़ो रुपये बैंक में जमाकंझावला गांव एक्सटेंशन के विकास कार्य के लिए दिल्ली सरकार ने वर्ष 2008 में ही 27.21 करोड़ रुपये नगर निगम को जारी कर दिया था। पैसा मिलने के छह साल बाद भी नगर निगम ने कार्य शुरू नहीं किया है। - 17 साल पहले कंझावला गांव लाल डोरा का हुआ था विस्तारवर्ष 1997 में, तत्कालीन भाजपा सरकार ने कंझावला गांव लालडोरा का विस्तार कर आवासीय और औद्योगिक कॉलोनी बसाने का निर्णय किया था।

करीब 2443 बीघा जमीन में फैले कंझावला गांव एक्सटेंशन में सरकार ने एक हजार परिवारों के लिए रहिाइशी और करीब इतने ही कारोबारियों के लिए उद्योग लगाने के लिए प्लॉट काटकर आवंटित किए थे। लेकिन वर्ष 1998 के विधानसभा चुनाव में भाजपा हार गई और दिल्ली में कांग्रेस की सरकार आई जो पंद्रह साल तक रही। वहां के कई लोगों ने बताया कि भाजपा सरकार में कॉलोनी बसाने के निर्णय होने की वजह से ही आजतक कोर्ट के आदेश के बावजूद कांग्रेस सरकार ने यहां के विकास के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

-करीब एक दशक से हम लोग मिलकर यहां के विकास कार्य के लिए सरकार, नगर निगम, जल बोर्ड के दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। हर बार विकास कार्य जल्द शुरू होने का आश्वासन के विभाग एक दूसरे पर जिम्मेदार टालते रहते हैं। बिजली, पानी, जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं होने की वजह से लोग यहां घर नहीं बना रहे हैं। जोगेंदर सिंहरहिायशी प्लॉट का आकार- 2 बीघा 2 बिस्वा का है। औद्योगिक प्लॉट आकार- 06 बिस्वा का है। ं।

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