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ठेकेदारों के नाम पर होती है कीमती लकडियों की कटान

 माधौगढ़। हिन्दुस्तान संवाद। पर्यावरण को संरिक्षत करने के लिये सरकार के लाख प्रयास विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से फलीभूत नहीं हो पा रहे हैं। रोज ही लाखों रूपये की कीमती लकडिम्यों को ठेकेदारों के नाम पर कटवाया जा रहा है। लेकिन विभाग है कि चुप्पी साध कर तमाशा देख रहा है। क्षेत्र में रोज हरे आम के पेड़, शीशम और नीम के पेड़ो को वन विभाग के इशारे पर कटवाया जा रहा है। जिसके लिये विभाग द्वारा ठेकेदार नियुक्त कर दिये गये हैं।

जबकि वन विभाग में ऐसे ठेकेदार रखने के कोई नियम नहीं है। जबकि क्षेत्र में ठेकेदारों द्वारा पेड़ मालिक से सीधा सम्पर्क साधकर वन विभाग के कर्मचारियों की सांठगांठ से लाखों रूपये की कीमती लकडिम्यों की अवैध कटान कर ली जाती है। लेकिन विभाग जुर्माना काटने की बात कहकर अवैध कटान के मामले में खानापूíत कर अपने फर्ज से पल्ला झाड़ लेता है। अगर इस प्रकार के मामले में विभाग की ओर से कोई कड़ी कार्यवाही की जाती तो इन ठेकेदारों के हौसले इतने बुलंद न होते कि वन रक्षक सहित तमाम अधिकारियों के सामने ही हरे पेड़ो की कटान जारी रहती।

वन विभाग पर ठेकेदारों का इस प्रकार शिकंजा है कि कभी अवैध कटान की बात उजागर हो जाये तो मजबूरी में विभाग जुर्माना काटता है और साथ ही सहृयता दिखाते हुये अन्य पेड़ो को औने—पौने जुर्माने दिखाकर काट लेने की अनुमति दे देता है। इस सबंध में रेंजर जेजे चतुर्वेदी का कहना है कि विभाग ऐसे किसी ठेकेदार को नहीं रखता है। साथ ही राजस्व की पूíत के लिये हमें इन ठेकेदारों पर 5—5 हजार का जुर्माना करना पड़ता है।

लेकिन ज्यादा कटान न हो उसके लिये ऐसे ठेकेदारों पर एफआइआर की जायेगी।

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