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जनता की समस्या सुनना नहीं चाहतीं गैस ऐजेंसी

हिन्दुस्तान संवाद अलीगढ़। जनता की सुविधा के लिए सरकारी कार्यालयों में फोन लगवाए गए। कार्यालयों पर उनके नंबर मोटे-मोटे अक्षरों से लिखवाए गए। जिससे परेशानी होने पर अधिकारियों से तत्काल संपर्क किया जा सके। वहीं अधिकारी दावा भी करते हैं कि समस्या होने पर फोन पर शिकायत दर्ज कराएं।

उसका तत्काल निस्तारण किया जाएगा। लेकिन ग्राहक शिकायत तो तब दर्ज कराएं जब अधिकारी फोन उठाएं। शिकायतकर्ता फोन मिलाते-मिलाते थक जाते हैं, लेकिन अधिकारी फोन नहीं उठाते हैं। समाज के हर स्तर से संबंध रखने वाली गैस एजेंसियों के संचालक, पुलिसकर्मी व एएमयू के रजिस्ट्रार शिकायतकर्ताओं की पीड़ा सुनने तक की जहमत नहीं उठाते हैं। फोन नहीं उठने के कारण शिकायतकर्ताओं को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सात मार्च को भी यही हुआ। दूरसंचार विभाग के आंकड़े असलियत खुलासा कर रहे हैं।

अधिकारियों और जनता के बीच संपर्क बना रहे। इसलिए कार्यालयों में फोन लगवाए गए। वहीं अधिकारियों ने अधीनस्थों को आदेश दे रखे हैं कि जनता की छोटी- छोटी समस्या का निस्तारण तत्काल किया जाए। लेकिन अधीनस्थों ने अधिकारियों के आदेश को हवा में उड़ा दिया। वे शिकायतकर्ताओं के फोन रिसीव करने की जहमत तक नहीं उठाते हैं। जिस कारण शिकायतकर्ताओं को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी कार्यालयों की कार्यप्रणाली की पोल बीएसएनएल से मिले आंकड़ो ने खोली है।

विभाग शिकायकर्ता द्वारा की कॉल रिसीव कॉलपुलिस 100 51फायर ब्रिगेड 39 19शिखा गैस गोदाम 988 40प्रीतमा सिंह गैस 239 22जावेद गैस सर्विस 145 42प्रेमनरायण गैस 503 25दुर्गा गैस सर्विस 113 15सैनानी गैस सर्विस 16 0जावेद सलीम 238 47जनता गैस सर्विस 1037 13गोविला गैस सर्विस 161 0मयूर गैस सर्विस 25 0माधव गैस सर्विस 6 0धनश्री गैस सर्विस 211 0कृष्णा उद्योग 271 36गैस सर्विस 89 11इग्नू 73 13एएमयू रजिस्ट्रार 246 38यूपी गर्वमेंट इम्प्लाइस वेलफेयर एसोसिएशन 65 18दूरसंचार पूरी तरह से सुचारू है।

सात मार्च के आंकड़ इस बात के गवाह हैं। विभाग के पास पूरी डिटेल है कि कितनी काल की गई औंर कितनी रिसीव हुई-आरवी वर्मा, जीएम, बीएसएनएल।

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