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सिंध में सूखा

यह सचमुच दर्दनाक है कि आज के दौर में भी करीब 40 मासूम कुपोषण की वजह से काल के गाल में समा जाएं। सिंध के थारपड़कर जिले में अकाल जैसे हालात पैदा हो गए हैं। यह रेगिस्तानी इलाका है। लेकिन यह घटना बताती है कि मुल्क की बेबस आबादी की सेहत की बात जब कभी भी आती है, तब हमारी हुकूमत बेपरवाह हो जाती है। करीब एक लाख, 75 हजार थारी परिवार अकाल के चलते अपना-अपना घर-बार छोड़कर दूसरे जिलों की ओर जा चुके हैं। इलाके के तालाब-पोखर पूरी तरह से सूख चुके हैं और खाने-पीने की जबर्दस्त किल्लत है। इससे बदतर और क्या हो सकता है कि इस इलाके में सेहत से जुड़ी सुविधाएं संतोष के लायक नहीं हैं। आबोहवा के खराब सूरतेहाल के चलते काफी तादाद में मवेशी मारे गए हैं। जैसी खबरें आ रही हैं, उन पर यकीन करें, तो इस आपदा का मुकाबला करने के लिए सिंध हुकूमत को जगाया गया है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के मुखिया बिलावल भुट्टो-जरदारी ने हुक्म दिया है कि सूबाई व्यवस्था राहत के कामों को तत्काल अंजाम दे, वहीं सिंध के मुख्यमंत्री ने मासूमों की मौत पर जांच का फरमान सुनाया है। हालांकि, यह सब नाकाफी और बड़ी देरी से उठाए गए कदम हैं।

गौरतलब है कि सिंध हुकूमत ने थार के बाशिंदों को गेहूं की 60,000 बोरियां देने का ऐलान किया था, लेकिन अब तक ये बोरियां उनके दरवाजे तक नहीं आई हैं। जानकार बताते हैं कि ये बोरियां मिल भी जाएं, तब भी थोड़ी हैं। ऐसा भी नहीं कि थार में पहली बार सूखा पड़ा हो; हर दो-तीन साल पर यह इलाका सूखे की चपेट में आ जाता है। फिर भी सरकार की राहत-योजनाओं में इसे शामिल नहीं किया जाता। सिंध में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी पांच साल हुकूमत में रह चुकी है और गए साल के चुनाव में उसने फिर जनता का भरोसा जीता। ऐसे में, यह यकीन करना दुश्वार है कि पार्टी के सूबाई और मरकजी सियासतदां इस इलाके के हालात से वाकिफ नहीं होंगे। थार से निकल चुके परिवारों और वहां रह रहे लोगों, दोनों को पूरी मदद-इमदाद और भोजन-पानी की जरूरत है। अगर रकम एक समस्या है, तो मरकजी हुकूमत या मददकर्ताओं से मदद ली जानी चाहिए।
द डॉन, पाकिस्तान

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