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चार हजार करोड़ से अधिक सरेंडर होने के आसार

रांची। हिन्दुस्तान ब्यूरो। राज्य सरकार के योजना खर्च की रफ्तार काफी धीमी है। वित्तीय वर्ष 2013-14 का योजना आकार 16,800 करोड़ के विरुद्ध फरवरी माह तक 6,011 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। मार्च के प्रथम सप्ताह में अधिकतम 500 करोड़ खर्च हुआ होगा। इस तरह अभी तक योजना मद के अधिक से अधिक 6,511 करोड़ खर्च हुए होंगे। चालू वित्तीय वर्ष के 20 दिन बचे हुए हैं, जिसमें 10,289 करोड़ रुपये खर्च करने की चुनौती सरकार के सामने हैं।

योजना विकास विभाग के अधिकारियों की मानें तो मार्च के अन्त तक अधिकतम 12,000 करोड़ रुपये खर्च होंगे। चार हजार करोड़ से अधिक राशि सरेंडर होना तय है। विभागों द्वारा 16,800 करोड़ की योजना आकार के विरूद्ध 9,880 करोड़ का आवंटन आदेश निकाला गया है।

तीन विभागों के खर्च की स्थिति दयनीय : एक हजार करोड़ से ऊपर योजना आकार वाले विभागों में ऊर्जा, मानव संसाधन, पथ निर्माण, ग्रामीण विकास, नगर विकास और जल संसाधन शामिल हैं। खर्च में सबसे खराब स्थिति ऊर्जा विभाग की है।

इसका योजना आकार 1001 करोड़ है, जिसके विरूद्ध फरवरी तक मात्र 183 करोड़ रुपये खर्च किया गया है। इसी तरह नगर विकास विभाग ने 1144 करोड़ में 335 तथा जल संसाधन ने 1900 करोड़ में 271 करोड़ ही खर्च किए हैं।

खर्च नहीं होने के हैं कई तर्क : राशि खर्च नहीं होने का मूल कारण सरकार का अस्थिर होना बताया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इस वित्तीय वर्ष में दो बार सरकार बनी और एक बार राष्ट्रपति शासन लगा।

नतीजतन, योजनाओं को सही समय पर प्रशासनिक स्वीकृति नहीं दी जा सकी। जिन योजनाओं को स्वीकृति दी गई उसका कार्यान्वयन किया जा रहा है। बड़ी योजनाओं का भुगतान मार्च के अन्त में होता है। भुगतान होने पर योजना खर्च 70 से 75 प्रतिशत तक पहुंच जाएगा।

चुनाव की घोषणा हो जाने के कारण एक बार फिर काम की गति धीमी हो गई है, जिसका असर खर्च पर पड़ेगा। फरवरी तक विभागों के खर्च विभाग बजट खर्च कृषि 542 157 पशुपालन 204 74 भवन 125 35 पेयजल 360 203 ऊर्जा 1001 183 खाद्य आपूर्ति 965 425 स्वास्थ्य 655 304 मानव संसाधन 1465 458 उद्योग 241 50 सूचना प्रौद्योगिकी 100 40 श्रम नियोजन 878 408 पंचायती राज 1080 508 योजना विकास 555 50 पथ निर्माण 1785 1056 ग्रामीण विकास 1200 246 समाज कल्याण 615 247 नगर विकास 1144 335 जल संसाधन 1900 271 कल्याण 718 82।

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