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लोकसभा सीटों को लेकर वाम दलों में असंतोष

पटना। हिन्दुस्तान ब्यूरो। बिहार में लोकसभा सीटों के बंटवारे को लेकर वाम दलों में असंतोष उभरने लगा है। फिलहाल यह असंतोष जदयू द्वारा कम सीटें देने के कारण है। जदयू ने भाकपा को दो सीटें ही दी हैं, जबकि माकपा से सीटों के मामले में तस्वीर अब तक साफ नहीं है।

भाकपा (सीपीआई) पांच सीटों पर अपना दावा पेश कर रही है। लेकिन जदयू उनकी दावेदारी बेगूसराय और बांका पर ही मान रहा है। सीपीआई ने बांका से पूर्व विधान पार्षद संजय कुमार और बेगूसराय से राजेन्द्र प्रसाद सिंह को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन इसको लेकर भी विरोध का स्वर मुखर होने लगा है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता शत्रुघ्न प्रसाद सिंह की दावेदारी बेगूसराय से थी। मधुबनी, पूर्वी चंपारण और खगडिम्या सीटों पर भी पार्टी की दावेदारी है। मधुबनी से हेमचंद्र झा व रामनरेश पांडेय टिकट चाह रहे हैं।

खगडिम्या से सत्यनारायण सिंह और पूर्वी चंपारण से अतीक अहमद व शालिनी मिश्र टिकट की दावेदारी जता रहे हैं। सीपीआई के वरिष्ठ नेता बद्रीनारायण लाल के अनुसार मात्र दो सीटें मिलने से पार्टी कार्यकर्ता खुश नहीं हैं। पार्टी को कितनी सीटों पर चुनाव लड़ना है, इसे केंद्रीय कमेटी तय करेगी।

सीपीएम भी पांच सीटों पर दावा कर रही है। वह दरभंगा, बेतिया, नवादा, भागलपुर और उजियारपुर सीट पर अपना अधिकार जता चुकी है। इन सीटों पर तालमेल नहीं होने पर पार्टी दोस्ताना संघर्ष के साथ उम्मीदवार खड़ा कर सकती है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता विजयकांत ठाकुर के अनुसार जदयू से अब तक सीटों को लेकर कोई वार्ता नहीं हुई है। 9-10 मार्च को राज्य कमेटी की बैठक में उम्मीदवारों के नाम और सीटों की संख्या के संबंध में निर्णय लिया जा सकता है। अभी पार्टी ने अपने स्तर से कोई फैसला नहीं लिया है। दोनों वाम दलों के कार्यकर्ता जदयू पर सीधे उपेक्षा का आरोप लगा रहे हैं।

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