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भगवान बुद्ध का म्यांमार से प्रगाढ़ संबंध रहा है

बोधगया-हमारे प्रतिनिधि। म्यांमार वासियों के साथ भगवान बुद्ध, उनके पदचिह्न् तथा महाबोधि मंदिर का सदियों से प्रगाढ़ संबंध रहा है। बोधगया, महाबोधि मंदिर तथा बौद्ध धर्म म्यांमार के लोगों में रचा-बसा है। म्यांमार के दृष्टिकोण से महाबोधि मंदिर 11वीं शताब्दी से 19वीं शताब्दी के राजा मिंडुमिन तक का इतिहास काफी गौरवमय रहा है। राजा मिंडुमिन ने महाबोधि मंदिर का जीर्णोद्धार भी करवाया था। भगवान बुद्ध के पदचिहनों का वर्णन वहां के इतिहास, शिलालेख आदि में विस्तार से मिलता है।

ये बातें शनिवार को प्रधानमंत्री की सुपुत्री तथा दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डा. उपिन्दर सिंह ने कहीं। वे बिहार हेरिटेज डेवलपमेंट सोसाइटी द्वारा आयोजित बोधगया का सदियों का सफर नामक सेमिनार में बोल रही थी। बोधगया में आयोजित सेमिनार का शनिवार को दूसरा दिन था। डा.उपिन्दर सिंह ने बोधगया द व्यू फ्रॉम म्यांमार नामक अपना शोध पत्र सेमिनार में प्रस्तुत किया। उनके शोध पत्र पर सेमिनार में कम्प्यूटर डिस्प्ले के माध्यम से उपस्थित प्राध्यापकों द्वारा प्रश्नोतरी कार्यक्रम में बहस हुई।

सेमिनार में प्रोफेसर वांगचुक दोरजी नेगी, डा. रजनीश कुमार मिश्रा, डा. सत्येन्द्र पांडेय, डा.सीताराम दूबे, डा. एक्यू अंसारी, डा. ओ.पी.जायसवाल, डा. अजीत प्रसाद, डा. पीके बसंत आदि ने भी अपना शोध प्रत्र प्रस्तुत किया। सेमिनार रविवार को सम्पन्न होगा।

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