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हत्याओं के नाम रहा नए कप्तान का कार्यकाल

मंझनपुर, निज संवाददाता। नवागत कप्तान के माहभर का कार्यकाल हत्याओं के नाम रहा। जिले भर में सात लोग मौत के घाट उतार दिए गए। हत्या-दर हत्या की आई बाढ़ से जिला कांपने लगा वहीं पुलिस भी घटनाओं के पीछे हांफती दिख रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि मौजूदा समय में जिले की पुलिसिंग कैसी है। उधर खुलेआम हो रही हत्याओं से लोग सहमे हुए हैं।

पुलिस अधीक्षक आरपी सिंह का स्थानांतरण जिले के लिए सात फरवरी को हुआ है। आठ फरवरी को एसपी ने जिले में आकर कार्यभार सम्भाल लिया। उनके स्थानांतरण वाले दिन से ही जिले में हत्या के मामले में तेजी आई। पहली घटना सात फरवरी को सराय अकिल थाने के चकपिनहा गांव में घटी। यहां पर अपहृत नामिना का शव पाया गया। हत्या की दूसरी घटना करारी थाने के बरई बंधवा व पिपरी के बिसौना में 23 फरवरी को घटी। बरई बंधवा में अंग्रेज पासी को उसके चचेरे भाई ने मौत के घाट उतारा तो बिसौना में नाली के विवाद का उलाहना देने गई लक्ष्मी देवी को लाठियों से पीटकर मार डाला गया।

तीसरी घटना सैनी में 27 फरवरी को हुई। देवीगंज के सर्राफा व्यापारी के बेटे पिंटू पुत्र रामचंद्र का शव पड़ोसी जनपद फतेहपुर के खागा में मिला। इसी तरह चार मार्च को सैनी कोतवाली के कनवार गांव में रामलाल की गला रेत कर हत्या कर दी गई। चरवा थाने में 7 मार्च को घटी घटना ने तो सबके रोंगटे खड़े कर दिए। यहां चिल्ला शहजबाजी गांव निवासी भयन व दानियालपुर निवासी पूर्व प्रमुख के भाई राजेश को गोलियों से भून दिया गया।

दोनो की मौके पर ही मौत हो गई। यूं कहें कि एसपी का एक माह का कार्यकाल हत्यारों के लिए मुफीद रहा। उन्होंने बेखौफ होकर घटनाओं को अंजाम दिया। बहरहाल पुलिस ने कुछ हत्यारोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है तो कुछ उनकी पकड़ से आज भी बाहर हैं। उधर हत्या का ग्राफ बढ़ने से जिलेवासी जहां सहमे हुए हैं वहीं सम्बंधित पुलिस भी हत्यारों पीछे भागते हुए हांफ रही है।

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