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क्यों न हम पत्नी को रानी,बेटी को राजकुमारी मान लें..

 लखनऊ। कार्यालय संवाददाता। पत्नी अपने पति को परमेश्वर मान सकती है, बेटी अपने पिता को भगवान की जगह दे सकती है तो क्यों न हम भी पत्नी को रानी और बेटी को अपनी राजकुमारी मान लें..सारी समस्याएं ही खत्म हो जाएंगी और महिलाओं को बराबरी का हक बिना मांगे ही मिल जाएगा। महिलाओं को बराबरी के हक पर बोलते हुए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने ये बातें कहीं।

शनिवार को बली प्रेक्षागृह में नेशनल काउंसिल ऑफ वूमेंस इन इंडिया और उप्र बाल कल्याण परिषद की ओर से आयोजित सेमिनार के समापन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि मौजूद मुख्यमंत्री ने महिलाओं को उनका हक देने का पुरजोर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इसकी शुरुआत हमें अपने घर से करनी होगी क्योंकि बेटे-बेटी में भेदभाव घर से ही शुरू होता है। इससे पूर्व उन्होंने प्रख्यात समाजसेविका रानी लीला रामकुमार भार्गव, रिटा. आईआरएस परवीन तल्हा और वीरता पुरस्कार से नवाजी गई बालिका वंदना को सम्मानित भी किया।

उनके साथ कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चौधरी भी मौजूद थे। कार्यक्रम के पहले सत्र में ‘बालिकाओं व महिलाओं के विरुद्ध बढ़ती बर्बरता व यौनअपराध’ विषय पर परिचर्चा हुई। साथ ही महिलाओं के सर्वागीण विकास पर भी काफी बातें हुईं। इस अवसर पर एनसीडब्ल्यूआई की अध्यक्ष रीता सिंह, एमएलसी डॉ. मधु गुप्ता, डॉ. मधु चतुर्वेदी समेत बड़ी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। सेमिनार में उठाई गईं प्रमुख मांगें-भ् दुराचार के आरोपियों को बेल नहीं मिलनी चाहिए। भ् ग्रामीण महिलाओं, बालिका विद्यालयों में शौचालय जरूर बनें।

भ् दुराचार व एसिड अटैक जैसी घटनाओं में फौरन न्याय के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट बनें और पीड़िताओं के पुनर्वास की व्यवस्था हो। हत्या एवं दुराचार के मामलों में ‘किशोर न्याय अधिनियम’ की धाराओं में आयु में परविर्तन किया जाए। ं।

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