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जमीन पर नहीं उतर पा रहे महिला सुरक्षा कानून

लखनऊ। कार्यालय संवाददाता।  वर्तमान में महिलाओं के प्रति सैकड़ो कानून बना दिए गए हैं लेकिन जमीनी स्तर पर इनका कोई वजूद नहीं है। इन कानूनों का सही ढंग से क्रीयान्वयन हो जाए तो काफी हद तक अपराधों में कमी आ सकती है। यह कहना है लखनऊ विश्वविद्यालय के कैलाश छात्रावास की प्रोवोस्ट शीला मिश्रा का। वह शनिवार को छात्रावास में महिला के प्रति चुनौतियों के सम्बन्ध में आयोजित एक संगोष्ठी में बोल रही थी।

गोष्ठी में डॉ.नीलम मिश्रा ने कहा कि चुनाव के इस दौर में राजनीतिक पाटियां महिलाओं की सबसे बड़ी हितकारी होने का दावा करती हैं। फिर भी, किसी भी पार्टी ने अपने यहां महिलाओं के हिस्से में 33 प्रतिशत आरक्षण की प्रणाली को लागू नहीं किया है। इससे साफ जाहिर है कि यह बस वादे करना जानती हैं। विधि संकाय की डॉ. कालिंदरी ने कहा कि वर्तमान में महिलाओं को अपने कानूनों के प्रति सजग रहने की जरूरत है। यह महिलाओं पर अपराध करने वालों के विरोध में कारगर साबित होगा।

प्रो. निधी बाला ने कहा कि लोगों को परिवार में पुत्र-पुत्री में अंतर नहीं करना चाहिए। इस मौके पर भारी संख्या में छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दज कराई।

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