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सिर्फ कानून महिलाओं को बंधनमुक्त नहीं बना सकता: प्रणब मुखर्जी

सिर्फ कानून महिलाओं को बंधनमुक्त नहीं बना सकता: प्रणब मुखर्जी

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर अपने संबोधन में कहा कि सिर्फ कानून महिलाओं का उत्थान नहीं कर सकते हैं और इन्हें प्रभावी प्रवर्तन के समर्थन की आवश्यकता है। प्रणब ने कहा कि नए कानून, फिर चाहे वे कितने भी अच्छे क्यों ना हों, उन्हें तंत्रगत समर्थन की जरूरत है। सिर्फ कानून हमारी महिलाओं को बंधन मुक्त नहीं बना सकता है।

उन्होंने कहा कि हमारे मानसिक और नैतिक ताने-बाने, सामान्य भावनाओं और सामाजिक व्यवहार को मूल रूप से बदलने की जरूरत है। हमारी माताओं और बहनों को सम्मान देने की परंपरा को पुर्नजीवित करने के लिए हमसे जो बन पड़े करना चाहिए। राष्ट्रपति ने छह महिलाओं को विभिन्न क्षेत्रों में उनके योगदान के लिए स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया।

प्रणब ने कहा कि गृहणी, माता, शिक्षिका, जमीनी स्तर पर व्यावसाई और कॉरपोरेट की दुनिया में शीर्ष कर्मचारियों के रूप में महिलाओं ने अपनी व्यक्तिगत कोशिशों के आधार पर आज के भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कृषि के क्षेत्र में मौजूद महिलाओं का विशेष जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाओं ने सभी क्षेत्रों में सम्मानित पेशेवर का स्थान प्राप्त किया है और उन्होंने विज्ञान, अंतरिक्ष अनुसंधान और अन्‍वेषण के क्षेत्र में भी बराबर का नाम कमाया है।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कृषि के क्षेत्र में योगदान दे रही महिलाओं के बारे में कहा कि वे भारत के खाद्य सुरक्षा का मुख्य आधार हैं और वह सभी महिला मजदूर जो हमारे देश के भौतिक ढांचा के निर्माण में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं।

स्त्री शक्ति पुरस्कार पाने वाली छह महिलाओं में दिल्ली से डॉक्टर वर्तिका नंदा शामिल हैं। रानी जी जेलियांग सहित नंदा को मीडिया के माध्यम से महिला मामलों में जागरूकता फैलाने के लिए सम्मानित किया गया है। नंदा लेडी श्रीराम कॉलेज में शिक्षण कार्य में लगी हुई हैं। उन्होंने सात पुस्तकें लिखीं हैं जिनमें से एक में तिहाड़ जेल की महिलाओं द्वारा लिखी कविताएं शामिल हैं। अन्य पुस्तक में महिला अधिकारों से संबंधित कविताएं हैं।

उन्होंने अपना पीएचडी प्रिंट मीडिया में बलात्कार का कवरेज विषय पर किया है। वह दिल्ली पुलिस की महिला एवं बाल सुरक्षा की विशेष इकाई की मानद मीडिया सलाहकार रही हैं और जागरूकता फैलाने में मदद की है। महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में योगदान के लिए ओडिशा की मानसी प्रधान को रानी लक्ष्मीबाई पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

महिला स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान के लिए आंध्र प्रदेश की डॉक्टर एम वेंकैया को रानी रूद्रम्मा देवी पुरस्कार से नवाजा गया। शिक्षा एवं प्रशिक्षण के क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए महाराष्ट्र की बीना सेठ लश्कारी को माता जीजाबाई पुरस्कार दिया गया। आंध्र प्रदेश की टी राधा के प्रशांति को अनाथों, दृष्टि बाधित, विकलांगों और गरीब महिलाओं की सहायता करने के लिए कन्नागी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

महिला अधिकार, लिंग भेद मामला, महिलाओं कानूनी काउंसलिंग और संस्थागत सहायता मुहैया कराने के क्षेत्र में योगदान के लिए महाराष्ट्र की डॉक्टर सीमा साखरे को देवी अहिल्याबाई होल्कर पुरस्कार दिया गया। सभी महिलाओं को पुरस्कार स्वरूप तीन लाख रुपए नकदी और एक प्रशस्तीपत्र दिया गया।

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