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पार्टी का हित पासवान की व्यक्तिगत भावना पर भारी पड़ा

पार्टी का हित पासवान की व्यक्तिगत भावना पर भारी पड़ा

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) प्रमुख राम विलास पासवान ने शनिवार को कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल होने के मामले में उन्होंने व्यक्तिगत भावना की तुलना में पार्टी के हितों को तरजीह दी।  
      
पासवान ने लोजपा में राजग के शामिल होने के बाद पहले औपचारिक संवाददाता सम्मेलन में एक सवाल के जवाब में स्वीकार किया कि राजग में शामिल होने से पहले उनके मन में ऊहापोह की स्थिति जरूर थी लेकिन पार्टी की संसदीय दल की बैठक में इस बारे में फैसला लिया गया और उन्होंने व्यक्तिगत भावना की तुलना में पार्टी के हितों को सर्वोपरि माना। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि गठबंधन के लिए संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) ही उनकी पहली व्यक्तिगत  पसंद थी लेकिन पार्टी के सामूहिक निर्णय को उन्होंने तरजीह देना बेहतर समझा। एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि समय के साथ चीजें बदल जाती हैं और हमें वर्तमान में जीना चाहिए।   
    
पासवान ने कहा कि 2002 के गुजरात दंगा मामले में भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह माफी मांग चुके हैं और अब इस मामले को तूल देना उचित नहीं है।  इस अवसर पर दलितों के दो और अन्य प्रमुख नेता सर्वरी रामदास अठावले और उदित राज मौजूद थे। अठावले की पार्टी कुछ माह पहले राजग में शामिल हुई है जबकि उदित राज की इंडियन जस्टिस पार्टी का भाजपा में विलय गत माह के अंत में हुआ है।

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