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हौसलों का पंख दो, फिर तरक्की की उड़ान देखो

हौसलों का पंख दो, फिर तरक्की की उड़ान देखो

वक्त का पहिया घूम चुका है। नारी शक्ति के रूप में एक सशक्त क्रांति दस्तक दे रही है। शुरुआत जरूर मंथर गति से हुई पर वह बहुत मजबूती से पांव जमा रही है। हर अग्नि परीक्षा से वह कुंदन बनकर निखर रही है। चाहे सीमाओं की निगहबानी हो, सागर के लहरों पर रोमांच हो या फिर ब्रह्मांड के रहस्यों का उद्घाटन, हर जगह वह अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही है। राजनीति के क्षेत्र में भी अपनी सशक्त भूमिका लिखने को उनमें बेचैनी है। वे अवसर की तलाश में हैं। अपने वोट की चोट के साथ राजनीति की उन कुरीतियों पर वे प्रहार करने को आतुर हैं जिन्होंने हमारे लोकतंत्र को वैश्विक फलक पर शर्मसार किया है। वे शिक्षा के हथियार से अपने को सुसज्जित कर इस समरांगण में कूदने को तैयार हो रही हैं। हिंदुस्तान की ओर से आयोजित आओ राजनीति करें और मारो वोट की चोट के मंच पर उन्होंने अपने फौलादी इरादों का खुलकर इजहार किया।

लोकतंत्र की नींव को मजबूत करने के लिए महिलाओं को राजनीति में बराबरी का दर्जा मिलना जरूरी है। साथ ही समाज को महिलाओं के प्रति अपनी सोच और नजरिए में भी बदलाव की जरूरत है। महिलाएं आज पुरुषों के वर्चस्व वाले क्षेत्रों में उनसे कदम से कदम मिलाकर काम कर रही हैं। उन्हें आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है। बस उनके हौसलों को पंख देने की जरूरत है।

हिन्दुस्तान ने शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर शहर की आधी आबादी के बीच ‘मुझे आजादी दो, मैं दुनिया बदल दूंगी’ विषय पर संवाद का आयोजन किया। संवाद में अध्यापन, समाजसेवा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में अपने हुनर से रंग भर रही महिलाओं ने शिरकत की। उन्होंने एक सुर से महिलाओं को बराबरी का हक देने की वकालत की। उनका कहना है कि महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाने वालों में भी महिलाओं का प्रतिनिधित्व होना जरूरी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के मंदिर में पिछले दिनों जिस तरह की अराजकता सामने आई, उसके पीछे संसद सदस्यों की आपराधिक पृष्ठभूमि भी जिम्मेदार है। विभिन्न राजनीतिक पार्टियों को अपना उम्मीदवार तय करते समय उनकी पृष्ठभूमि भी खंगाल लेनी चाहिए। साथ ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए राजनीतिक पार्टियों को टिकट में उन्हें तरजीह देना चाहिए।

महिलाओं ने कहा कि अक्सर विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के नेता समाचार चैनलों की बहस में महिला सशतिकरण का मजाक उड़ाते हैं। यह उनकी दूषित मानसिकता का परिचायक है। महिलाओं ने कहा कि आज तमाम राजनीतिक पार्टियों में परिवारवाद तेजी से पनप रहा है। वंशवाद की राजनीति देश के लिए सबसे खतरनाक है। इस तरह की राजनीति में समाज के हितों से जुड़े मुद्दे हाशिए पर रह जाते हैं। उन्होंने कहा कि वक्त तेजी से बदल रहा है। महिलाओं को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता है। बस उनके हौसले को खुले आसमान में पंख लगाने की जरूरत है।

मुख्य समस्या
महिलाओं को लेकर गैर बराबरी का नजरिया, महिला को अनुगामिनी मानने की सोच
सुरक्षा के नाम पर लड़कियों को आगे बढ़ने के अवसर न देना
असुरक्षित वातावरण, पुलिस प्रशासन का असहयोगात्मक रवैया
शिक्षा की कमी और रूढिवादी सोच
राजनीनिक पार्टियां महिलाओं की सुरक्षा की बात तो करती हैं, लेकिन यह सिर्फ चुनावी घोषणा पत्र में सिमट कर रह जाता है
पार्टियां महिलाओं को चुनावी टिकट देने में हाशिए पर रखती हैं
राजनीति में जातिवाद का हावी होना खतरनाक है

मुख्य समाधान
लड़के और लड़कियों को शिक्षा के बराबर अधिकार मिलें
लड़कियों की परवरिश में उनके सम्मान और आत्मविश्वास को बढ़ाने पर जोर हो
समाज महिलाओं के प्रति अपनी सोच और नजरिया बदले
संसद में आधी आबादी की भागीदारी को बढ़ावा मिले
कमजोर तबके की महिलाओं को जागरूक करने की जरूरत है
राजनीति से जातिवाद और वंशवाद को खत्म करने की आवश्यकता है
नेताओं को शैक्षणिक आधार पर टिकट मिले

आरक्षण जाति के आधार पर न होकर आर्थिक आधार पर होना चाहिए। आर्थिक रूप से तंग लोगों को मौका देना चाहिए। कॉलेजों में जातिगत सुविधाओं को खत्म किया जाए।
उर्मिला पोखरियाल, योग शिक्षिका

टिकट उसी को दिया जाए जो महिलाओं के हित में काम करे। हम जिस प्रत्याशी को चुनेंगे उसके हाथों में क्षेत्र के विकास की कमान होगी।
विमला बाथम, उद्यमी

महिलाओं के साथ अक्सर रात में अनहोनी की आशंका रहती है। महिलाएं अपना वोट उन्हें ही दें, जो रात में दिन जैसी सुरक्षा की गारंटी सुनिश्चित करें।
आशा जोशी, समाजसेवी

महिलाएं कभी किसी काम में पीछे नहीं रहतीं। वे हर जिम्मेदारी को पूरा करती हैं। इस मायने में वे सशक्त हैं।
नीलिमा मिश्रा, अध्यक्ष, जन कल्याण ट्रस्ट

हमें ऐसे उम्मीदवार को वोट देना चाहिए, जो महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों की सुनवाई के लिए फास्टट्रैक कोर्ट में सुनवाई के लिए काम करें।
-कविता सुयाल सामाजिक कार्यकर्ता

अपराधियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए। महिलाओं पर अत्याचार करने वालों को कठोर सजा दी जाए। इस पर हम सब को मिलकर काम करना होगा।
पुष्पा शाह, समाजसेवी

जो हम आज बच्चों को सिखाएंगे, वहीं कल के समाज की सोच होगी। हमें बच्चों को अभी से नैतिक जिम्मेदारी का अहसास कराना होगा।
- प्रभजोत दीक्षित, कॅरियर काउंसलर

कानून व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए हम पढ़े-लिखे प्रतिनिधि के चुनाव पर जोर दें। बदलाव लाने के लिए आंदोलन जरूरी नहीं।
लीना, मार्केटिंग हेड, निजी कंपनी समूह

अच्छी योजना बनाने के लिए जन प्रतिनिधियों को जनता की राय के लिए मंच तैयार करना होगा। इससे लोग सरकारी नीतियों में भागीदार बन सकेंगे।
पारूल, प्रवक्ता

वोट देते समय हमारी पहली पसंद साक्षर प्रत्याशी होना चाहिए। सरकारी तंत्र में कमी बताने से अच्छा है कि हम स्वयं बदलाव की शुरुआत करें।
-कल्पना मिश्रा, समाजसेवी

संसद में महिलाओं को मिलने वाला 33 फीसदी आरक्षण बेमानी है। घर में बेटी और बेटे को बराबर का हक देना चाहिए।
- नीलम कुकरेजा, गृहणी

बेटे के साथ बेटियों को भी शिक्षा के लिए बराबरी होनी चाहिए। इससे समाज की सोच बदलने में मदद मिलेगी।
- काम्या, कार्पोरेट कर्मी

महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों को सही ढंग से दर्ज किया जाना चाहिए। ऐसा तब होगा जब महिला हेल्पलाइन सुचारु रूप से चले।
-सुशीला समाजसेवी

पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं लड़कियां
नोएडा।
इंस्टीटय़ूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (आईएमएस) में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर डांस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस दौरान संस्थान के लगभग दो दर्जन से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। प्रतियोगिता में छात्रों ने हिपहॉप, फ्री-स्टाइल, बॉलीवुड, पंजाबी, भंगड़ा और सालसा पेश किया। शुक्रवार को आईएमएस में आयोजित प्रतियोगिता के दौरान शैक्षणिक निदेशक डां. कमलजीत सिंह ने कहा कि वर्तमान सदी महिला सशक्तिकरण का युग है।

आज की महिलाएं, पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। इसलिए हमारा फर्ज है कि हम समाज की आधी आबादी और भावी पीढ़ी की जन्मदात्री होने के नाते उनका सम्मान और आदर करें, इसी में समाज का हित है। उन्होंने कहा कि स्वस्थ्य नारी ही स्वस्थ्य समाज का निर्माण कर सकती है। इस मौके पर प्रतियोगिता में विजयी प्रतिभागी बीजेएमसी प्रथम वर्ष की छात्रा शिवांगी को प्रथम और बीबीए द्वितीय वर्ष के छात्र पंकज चौहान को द्वितीय पुरस्कार दिया गया।

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