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प्रदूषण से खुद बीमार बेरमो अनुमंडलीय अस्पताल

फुसरो। प्रतिनिधि। बेरमो कोयलांचल का हृदय स्थल कहे जाना वाला फुसरो बाजार बैंक मोड़ इन दिनों प्रदूषण की चपेट में है। प्रदूषण का सबसे भयंकर मार बेरमो अनुमंडलीय अस्पताल ङोल रहा है। इस बात का अंदाजा करोड़ो रुपए की लागत से बने अस्पताल के नए भवन के बाहरी दीवारों को देखकर ही लगाया जा सकता है। जिसे धूल व कोयले के कणों ने चारों ओर से लपेटा हुआ है।

हालांकि दुर्भाग्य है इस क्षेत्र का जो शुरू से ही धूल-गर्द और उड़ती कोयला कणों के कारण प्रदूषण से प्रभावित रहा है। फुसरो फ्लाई ओवर के कारण सारी ट्रांसपोर्टिग व भारी वाहन अस्पताल के प्रवेश द्वार शहीद निर्मल महतो चौक से ही टर्न लेती है। जिससे सर्वाधिक धूल यहां उडती है।

जिस कारण अस्पताल परिसर, अस्पताल भवन व कक्ष सभी धूल व कोयला कण से प्रभावित है। इन सब के बीच बीते 24 जनवरी को जननायक कर्पूरी ठाकुर जयंती के मौके पर झारखंड सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सह स्थानीय विधायक राजेन्द्र प्रसाद सिंह ने अस्पताल को लेकर काफी सारी घोषणाएं की थी।

जिनमें अस्पताल के पुराने जर्जर भवन क ो तोड़कर एक सुंदर सा पार्क व डाक्टरों व अन्य के लिए आवास निर्माण के अलावा अस्पताल के चाहरदीवारी को ऊं चा करने, आकर्षक बड़ा सा प्रवेश गेट जिसमें रात्रि में आने-जाने वालों के लिए छोटा गेट भी अटैच हो।

परंतु फिलहाल की स्थिति तो यही है कि जब तक मंत्री जी की घोषणाओं पूरी तरह से अमलीजामा नहीं पहन लेती तबतक तो प्रदूषण की बीमारी से ग्रसित ही रहेगा अस्पताल।

प्रदूषण मुक्त को लेकर उठती रही है आवाजः बेरमो अनुमंडलीय अस्पताल ही नहीं बल्कि आसपास के प्रभावित क्षेत्रों को भी प्रदूषण मुक्त करने को लेकर हर बार आवाज भी उठती रही है।

यहां के व्यवसायी व जनता एकसाथ होकर प्रदूषण की समस्या को लेकर स्थानीय प्रशासन सहित ऊंचे से लेकर नीचे तक के स्थानीय जनप्रतिनिधियों को भी अनगिनत बार अवगत करा चुके हैं। हर बात होती है तत्काल व्यवस्थाप्रदूषण को लेकर मुख्य रूप से जिम्मेवार सीसीएल प्रबंधन द्वारा मामले से सबों की आवाज को बंद कराने के लिए जल छिडकाव की व्यवस्था की जाती है। लेकिन तभी तक जब तक की लोगों को याद रहे। जैसे की पिछले 2-3 सप्ताह से शायद जल-छिड़काव बंद है।

जिससे पूरा क्षेत्र फिर अपने पुराने हाल में आ गया है। बेरमो अनुमंडलीय अस्पताल को लेकर स्वास्थ्य मंत्री की घोषणाएं जैसे ही मूत्र्त रूप में आएगी, खुद-ब-खुद प्रदूषण के प्रभाव से मुक्त हो जाएगी अस्पताल। फिलहाल तक तो कोई व्यवस्था नहीं है। डॉ शशिभूषण प्रसाद सिंहसिविल सजर्न, बोकारो

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